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हिमाचल में लड़कियों की शादी की उम्र 18 से 21 साल करने का विरोध

हिमाचल में लड़कियों की शादी की उम्र 18 से 21 साल करने का विरोध
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शिमला : हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा लड़कियों की शादी की उम्र 18 से 21 साल करने के प्रस्ताव का विरोध शुरू हो गया हैं। अखिल भारतीय जनवादी
महिला समिति लड़कियों की विवाह की उम्र 18 से 21 वर्ष करने के प्रस्ताव के विरोध में उतर आई है। समिति की राज्य कमेटी ने तर्क दिया है कि 18 वर्ष की उम्र में लड़की सरकार चुनने के लिए वोट
देने के लिए पात्र हो सकती है तो योग्य जीवन साथी चुनने के लिए क्यों नहीं। आरोप लगाया है कि शादी की उम्र बढ़ाने संबंधी विधेयक सरकार
ने विधानसभा में जल्दबाजी में पेश किया और बिना चर्चा के पारित कर दिया। महिलाओं से जुड़े विधेयक
पर महिला संगठनों से चर्चा की जानी चाहिए थी। विधेयक के खिलाफ महिला समिति राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपेगी।

समिति की राज्य अध्यक्ष डॉ.वीना वैद्य और राज्य सचिव फालमा चौहान का कहना है कि 18 वर्ष की
उम्र में देश का नागरिक चाहे महिला हो या पुरुष वयस्क हो जाता है। पारिवारिक कानून में सुधार पर देश के विधि आयोग की 2008 की रिपोर्ट में लड़के और लड़कियों के लिए विवाह की एक समान उम्र 18 वर्ष तय की गई है। महिलाओं के कहा, महिलाओं से जुड़े विधेयक पर महिला संगठनों से चर्चा की जानी चाहिए। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भी विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित है।उन्होंने कहा कि यह विधेयक लड़कियों को अपनी पसंद के लड़के से विवाह करने के कानूनी अधिकार से वंचित करेगा।

समिति की सचिव फालमा चौहान का कहना है कि प्रदेश के अस्पतालों में महिला और बच्चों के
पर्याप्त डॉक्टर नहीं है, बच्चे कम वजन के पैदा हो रहे हैं, बच्चियों में खून की कमी है, स्कूल में छेड़छाड़ की घटनाएं हो रही हैं, गांवों में स्कूल
दूर होने के कारण लड़कियां शिक्षा से वंचित रह गई हैं, सरकार को इन समस्याओं के समाधान के लिए
प्रयास करने चाहिए।

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