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31 जनवरी के बाद पंचायत प्रधान सरकारी कागजात पर कोई हस्ताक्षर नहीं कर सकेंगे….

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श्यामलाल पुंडीर
शिमला। इस साल 31 जनवरी तक ही प्रधानों की शक्तियां रहेगी। इस दिन से पंचायतीराज संस्थाओं का कार्यकाल जाएगा पूरा हो जाएगा और इसके बाद प्रशासक के पास भी शक्तियां सीमित रहेगी।

इसके बाद पंचायतों में प्रशासक की तैनाती की जाएगी। इसके लिए अध्यापकों को की छोड़कर पंचायत सचिव, पटवारी और कानूनगो को यह जिम्मा सौंपा जा रहा है, लेकिन प्रशासकों के पास विकास कार्यों को कराने की सीमितशक्तियां रहेगी। डीडीओ की आगे इस समय पंचायतों में चल
रहे करोड़ों रुपये के काम शक्तियां बीडीओ के पास रहेंगी।

हिमाचल में पंचायत स्तर पर दर्जनों अभियान चल रहे हैं। इसमें स्च्छता, नशा मुक्त पंचायतें,
खुली सिगरेट बेचने पर जुर्माना, सड़क के किनारे रोड़ी, रेता फेंकने पर कार्रवाई, पंचायतों में अवैध
निर्माण को रोकना आदि कार्य चल रहे हैं।
इन कार्यों की निगरानी पंचायत प्रधान की अध्यक्षता में की जाती है। इसके अलावा पंचायतों में लोगों के
पड़ेंगे विकास के बाद धीमे पड़ेंगे हितों को लेकर बैठकों की अध्यक्षता भी पंचायत प्रधान करते हैं।

31 जनवरी के बाद पंचायत प्रधान
सरकारी कागजात पर कोई हस्ताक्षर
नहीं कर सकेंगे। न ही मौके का
निरीक्षण कर सकते हैं।
लोगों की समस्याओं को प्रशासक
ही सुन सकेंगे। हिमाचल प्रदेश में
इस समय पंचायतों में करोड़ों के
कार्य चल रहे हैं। इसमें रास्तों के
निर्माण के साथ किनारों पर रेलिंग,
स्ट्रीट लाइटें, वर्षा शालिकाओं का
निर्माण, श्मशानघाट बनाए जा रहे
हैं। अब प्रशासक स्तर पर ही इसकी
निगरानी हो सकेगी।

अब चुनाव को लेकर सरकार और चुनाव आयोग में होगा मंथन

शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव को लेकर दो तरफा
मंथन चल रहा है। हाईकोर्ट के आदेशों के बाद प्रदेश सरकार मंथन में जुटी है तो
दूसरी तरफ चुनाव आयोग पंचायत चुनाव की तैयारियों में जुटा है। मुख्य सचिव की
अध्यक्षता में आज पंचायतीराज सचिव और शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिव की बैठक होनी प्रस्तावित है। इसके बाद सरकार के अधिकारी राज्य निर्वाचन आयोग के साथ बैठक कर हल निकालने पर चर्चा करेंगे।

हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल से पहले पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने फिर से
वार्डों का पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन शुरू किया है। उपायुक्तों को 15 दिन के भीतर
काम पूरा करने के लिए कहा गया है, लेकिन हाईकोर्ट के आदेशों के बाद यह
प्रक्रिया भी ठंडे बस्ते में पड़ती नजर आ रही है।

दूसरी ओर राज्य निर्वाचन आयोग
ने पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव की तैयारियां तकरीबन पूरी कर ली हैं। वार्डों को पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन के बाद मतदाता सूची तैयार कर ली है। मतदाता सूचियों के छपाई का काम शेष है। विभाग के सचिव सी. पालरासु ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेशों के चलते मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक होनी है। इसके बाद निर्वाचन आयुक्त के साथ भी इस मामले में विस्तृत चर्चा होगी।

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