शिलाई के समाजसेवी नाथूराम चौहान ने कहा कि जनजाति का दर्जा मिलना तीन लाख हाटियों के संघर्ष का परिणाम है। यहां स्थानीय विश्राम गृह में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि समुदाय के अलावा मीडिया के लोगों का इसमें बहुत बड़ा योगदान रहा है जिन्होंने इतने सालों से इस मुद्दे को उठा कर रखा।
उन्होंने कहा कि इस बार हाटीयों ने आर पार की लड़ाई का मूड बना लिया था जिस कारण कांग्रेस और भाजपा के नेताओं को भी झुकना पड़ा है। यह दुनिया का ऐसा सबसे बड़ा आंदोलन है जो 55 साल तक शांतिपूर्ण तरीके से चलता रहा।
उन्होंने कहा कि हाटी समितियों का भी इसमें बहुत बड़ा योगदान है और कई लोग तो संघर्ष करते-करते इस दुनिया से चले गए। उन लोगों को भी याद करने का वक्त है कई महिलाएं और बुजुर्ग यह कहते थे कि पता नहीं दर्जा कब मिलेगा तब तक हम रहेंगे कि नहीं रहेंगे।
कुछ इस दुनिया से चले गए लेकिन शांतिपूर्ण आंदोलनकारी आने वाले बच्चों के भविष्य के लिए बहुत कुछ कर गए। 14 सितंबर का दिन इतिहास में लिखा जाएगा क्योंकि यह हमारे लिए उत्सव का पर्व है। 55 साल से प्रयास होते रहे। जेपी नड्डा का भी बहुत बड़ा योगदान है।

