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Wed. Jul 22nd, 2026

क्या गंगा जल अब पीने लायक है ?

प्रयागराज : पद्मश्री डॉ. अजय सोनकर का दावा है कि गंगा में पाए जाने वाले 1100 प्रकार के जीवाणु भोजी(बैक्टीरियोफेज) प्राकृतिक रूप से गंगा जल की सुरक्षा करते हैं।गंगा दुनिया की इकलौती मीठे जल वाली नदी है। इसमें एक साथ बैक्टीरिया मारने की अद्भुत ताकत है। गंगा नदी अपनी अद्भुत स्व-शुद्धिकरण क्षमता प्रदूषण के खतरे को तुरंत टाल देती है।

उनके दावों के अनुसार, बैक्टीरियोफेज
गंगा जल में 50 गुना रोगाणुओं को कुछ ही क्षणों में मारकर उसका आरएनए हैक कर लेता है। गंगा जल की ताकत समुद्री के पानी के समान है। जब लाखों लोग गंगा में डुबकी लगाते हैं, तब शरीर से निकलने वाले रोगाणुओं को गंगा खतरा समझती है और तत्काल प्रभाव से जीवाणु भोजी सक्रिय हो जाते हैं।

बैक्टीरियोफेज बैक्टीरिया से 50
गुना छोटे होते हैं। जीवाणु भोजी प्रदूषण
और हानिकारक बैक्टीरिया का समूल नाश कर खुद भी विलुप्त हो जाता है।
डॉ. सोनकर का कहना है कि उन्होंने
दुनिया में कैंसर, डीएनए- बायोलॉजिकल
जेनेटिक कोड, सेल बायलॉजी एंड
ऑटोफैगी पर बड़े महत्वपूर्ण शोध किए हैं।
यही नहीं, नीदरलैंड की वैगनिंगन
यूनिवर्सिटी, राइस यूनिवर्सिटी, ह्यूस्टन
अमेरिका, टोक्यो इंस्टीट्यूट ऑफ
टेक्नोलॉजी, हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के
साथ काम किया है। डॉ. अजय सोनकर ने अपने अनुसंधान से समुद्र में मोती बनाने की विधा में जापान के एकाधिकार को न सिर्फ समाप्त कर दिया बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा और बहुमूल्य मोती बना कर पूरी एक ग्लोबल वेव पैदा कर दी थी।

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