हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हाटीयों को जनजाति दर्जे के मामले में आज फिर 16 दिसंबर को तारीख दी है। गौरतलब है कि लोकसभा, राज्यसभा और राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद 55 साल पुरानी हाटी समुदाय को जनजाति दर्जे की मांग पूरी हो चुकी थी। लेकिन कुछ लोगों द्वारा इस मामले को अदालत में ले जाने के बाद और अदालत में अब तक 5 तारीख लग चुकी है।
अदालत ने भी पहले इस मामले में अलग फैसला दिया। एक ने प्रमाण पत्र जारी करने के आदेश दिए और फिर दूसरे ने रोक लगा दी। लोग अदालत के फैसले का इंतजार भी कर रहे है। लेकिन अगर अदालत का फैसला खिलाफ जाता है। तो इसके बाद की रणनीति भी बनाई जा रही है। इस मामले को लेकर गिरिपार की 154 पंचायतों में रहने वाले समुदाय के लोगों में रोष पनप रहा है। ये रोष लोकसभा चुनाव में भी देखने को मिला।
जिन विकासखंड में समुदाय के लोग रहते है। इन स्थानों में कांग्रेस को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। पांवटा विकासखंड के तहत आंज भोज की 11 पंचायतों में बीजेपी को 2000 से ज्यादा वोट की लीड मिलना इस बात का साफ संकेत है कि युवा वर्ग सरकार से नाराज है। युवा वर्ग अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। जब से ये मामला अदालत में गया हैं। तब से कई युवा ओवरेज हो चुके है। अभी जो युवा 12वीं पास कर चुके उनको मेडिकल और अन्य संस्थानों में प्रवेश के लिए भारी फीस चुकानी पड़ रही है। ये कारण है कि कांग्रेस को लोकसभा में इस मुद्दे से भारी नुकसान हुआ है।
इस मामले में केंद्रीय हाटी समिति के अध्यक्ष डॉ. अमीचंद कमल ने कहा कि वो हाटी समुदाय को उनका हक दिलवाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह समाज को जोड़ने में भरोसा रखते हैं तोड़ने में नहीं। समिति हमेशा लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात समाज के बीच रखती रही है। हाटी समुदाय के मामले को लटकाने से छात्रों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। फिर भी समिति हाईकोर्ट में अगली सुनवाई का इंतजार करेगी।
हाटी समुदाय के लोगों को अब जनजातीय प्रमाणपत्र लेने के लिए न्यायालय के निर्णय का इंतजार करना होगा।
