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उपलब्धि : गिरिपार के खोदरी माजरी के ऋषुध बने स्टैनफोर्ड की एडवाइजरी काउंसिल के छात्र प्रतिनिधि

उपलब्धि : गिरिपार के खोदरी माजरी के ऋषुध बने स्टैनफोर्ड की एडवाइजरी काउंसिल के छात्र प्रतिनिधि
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श्यामलाल पुंडीर
पांवटा साहिब : गिरिपार के खोदरी माजरी के ऋषुध स्टैनफोर्ड की एडवाइजरी काउंसिल के छात्र प्रतिनिधि बनकर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया हैं। स्टैनफोर्ड ने ऋषुध को दो बड़ी उपलब्धियां दी हैं। एक तो उन्हें विश्वविद्यालय का शताब्दी शिक्षण पुरस्कार मिला, जो उत्कृष्ट शिक्षण के लिए दिया जाता है, और दूसरा उन्हें डोर स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी की एडवाइजरी काउंसिल में 200 से अधिक पीएचडी छात्रों में से दो छात्र प्रतिनिधियों में से एक चुना गया है।

इस 22 सदस्यीय काउंसिल में बिल गेट्स, एन. चंद्रशेखरन और जमशेद गोदरेज जैसे अरबपति, नोबेल पुरस्कार सम्मानित वैज्ञानिक और दिग्गज नेता भी शामिल हैं। दो साल की इस टर्म में ऋषुध छात्रों की राय विश्वविद्यालय के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाएंगे। ऋषुध ठाकुर अमेरिका के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में पीएचडी कर रहे हैं।

ऋषुध का गांव हिमाचल-उत्तराखंड सीमा पर टोंस और यमुना के संगम पर बसा है। उनके पूर्वज तीन पीढ़ी पहले उत्तराखंड के जौनसार बावर क्षेत्र से यहां आकर बसे थे। बचपन से ही उन्हें प्रकृति, नदियों और पहाड़ों से लगाव था। वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बी.टेक करने के दौरान 2018 की केरल-कर्नाटक बाढ़ ने उनके मन में सवाल जगा दिया – “क्या सैटेलाइट इमेजरी द्वारा पहले से बाढ़ संभावित क्षेत्रों की पहचान की जा सकती है?”

इसी जिज्ञासा में उन्होंने सैटेलाइट इमेजरी और हाइड्रोलॉजी विधियों का इस्तेमाल कर कर्नाटक के कूर्ग के बाढ़ संभावित क्षेत्रों का नक्शा तैयार किया। इसके बाद आईआईटी रुड़की में रिसर्च इंटर्नशिप के दौरान उन्होंने देवदार, बांज, चीड़ जैसे पेड़ों की प्रजातियों और जंगलों द्वारा कार्बन भंडारण का सैटेलाइट आधारित नक्शा बनाने के तरीकों पर काम किया।

2021-23 में ऋषुध ने स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग में मास्टर्स की। इसी दौरान उन्हें विश्व प्रसिद्ध अंतरिक्ष एजेंसी नासा में तीन महीने रिसर्च करने का अवसर भी मिला, जहां उन्होंने सैटेलाइट डेटा का इस्तेमाल कर फसलों की सिंचाई आवश्यकता का आकलन किया। वर्तमान में वे स्टैनफोर्ड के जियोफिजिक्स (भू-भौतिकी) विभाग में पीएचडी कर रहे हैं। उनका शोध सैटेलाइट डेटा के माध्यम से जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने और जैव-विविधता को बचाने पर केंद्रित है।

ऋषुध का मानना है कि सैटेलाइट से प्राप्त होने वाला डेटा भारत जैसे देशों के लिए वरदान है क्योंकि इससे कम लागत में बड़े क्षेत्र की निगरानी संभव है। वे कहते हैं “जलवायु परिवर्तन का सबसे ज्यादा असर हमारे जंगलों, जल-स्रोतों और वन्य प्राणियों पर पड़ रहा है, जिस पर अब बात होना जरूरी है। पीएचडी पूरी करने के बाद ऋषुध का लक्ष्य भारत लौटकर देवभूमि में रहकर रिसर्च करना और स्थानीय लोगों को इसमें जोड़ना है।
उन्होंने देवभूमि के लोगों को संदेश दिया – “हम सबकी जिम्मेदारी है कि हम अपने जंगल-पहाड़, जल-स्रोतों को बचाकर रखें, इन्हें दूषित न करें। इन्हें सबसे बड़ा खतरा हम इंसानों से ही है।”

“ऋषुध अपनी सफलता का श्रेय अपने माता शांति ठाकुर व पिता डी.एस. ठाकुर को देते हैं, जिन्होंने बचपन से ही उन्हें समाज और दुनिया से जोड़कर रखा, और साथ ही अपने अध्यापकों को जिन्होंने उनका रिसर्च में मार्गदर्शन किया।

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