अर्जुन का अगला लक्ष्य राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेना है।
पांवटा साहिब: श्यामलाल पुंडीर संपादक देश की आवाज विशेष रिपोर्ट
जिला सिरमौर में धौलाकुआं स्थित 6वीं पुलिस रिजर्व बटालियन और सिरमौर राइफल एसोसिएशन द्वारा आयोजित शूटिंग स्पर्धा में अर्जुन ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। अर्जुन सिंह चौहान मात्र 10 साल 5 महीने की उम्र में प्रतियोगिता के दो अलग-अलग इवेंट्स में भाग लेकर कांस्य पदक जीतने वाले प्रतिभागी बने। उन्होंने 10 मीटर राइफल सब यूथ वर्ग और 50 मीटर राइफल प्रोन सब यूथ (ओपन साइट) में शानदार प्रदर्शन करते हुए दो पदक अपने नाम किए। इतनी कम उम्र में दो पदक जीतना निश्चित ही अद्वितीय उपलब्धि है।
अर्जुन सिंह चौहान 50 मीटर राइफल प्रोन सब यूथ (ओपन साइट) वर्ग में भाग लेने वाला सबसे युवा निशानेबाज बना।वहीं, उनके पिता अभय सिंह चौहान ने भी 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल मास्टर्स पुरुष वर्ग में रजत पदक जीतकर यह जता दिया कि यह टैलेंट केवल एक पीढ़ी तक सीमित नहीं है। अभय खुद एक समर्पित निशानेबाज़ हैं और बेटे के मार्गदर्शक भी।
अर्जुन ने बताया कि उसे शूटिंग में उसके माता पिता और छोटे भाई अभिराज सिंह चौहान से हमेशा सहयोग मिला है और उनका परिवार एक टीम की तरह काम करता है।वहीं उसके माता पिता ने बताया कि उन्होंने अर्जुन पर कभी भी किसी तरह का कोई दबाव नहीं बनाया और वो समर्पित हो कर आनंद लेते हुए अभ्यास करता है।अर्जुन ने हाल में ही अरिहंत इंटरनेशनल स्कूल में पांचवीं कक्षा में एडमिशन लिया है और अपने स्कूल के प्रिंसिपल सनी पी जोसफ का धन्यवाद किया उनके अलावा अपने कोच करणवीर सिंह का धन्यवाद किया जिन्होंने प्रतियोगिता के दौरान उसे बहुत प्रोत्साहित किया।
अर्जुन सिंह चौहान का जन्म 24 दिसंबर2014 को जिला सिरमौर के हरिपुर खोल गांव में हुआ।अर्जुन के पिता अभय सिंह चौहान कृषि एवं बागवानी का काम देखते हैं और माता दीपा चौहान महाविद्यालय पांवटा साहिब में सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत है।अर्जुन को बचपन से ही शूटिंग के प्रति विशेष लगाव रहा है जो उसे अपने पिता ,अपने दादा रिटायर्ड प्रिंसिपल अशोक चौहान एवं अपने ताऊ मेजर विजय सिंह चौहान से विरासत में मिला ।उसके पिता जो खुद 1997 के शूटिंग में अपने वर्ग के विजेता रहे पढ़ाई के बाद दिल्ली जॉब करने के कारण और अमेरिका में ट्रेनिंग पर जाने के कारण शूटिंग को ज्यादा वक्त नहीं दे ।लेकिन अर्जुन के जन्म के 2वर्ष बाद अपने माता पिता के गांव में अकेले।रहने और बुजुर्गों के कारण वहांपर रहने से उनको आने वाली दिक्कतों को देखकर अभय चौहान ने दिल्ली में अमेरिका की प्रतिष्ठित संस्था से नौकरी छोड़कर अपने गांव हरिपुर खोल लौट आए और अपने बाग और कृषि का काम देखने लगे।यहीं से उन्होंने अपने 3 साल के बेटे अर्जुन को शूटिंग की ट्रेनिंग देनी शुरू की।शुरू के लगभग एक वर्ष तक अर्जुन को केवल गन एटिकेट्स और उसे हैंडल करने के बारे में ही बताया गया ।फिर धीरे धीरे बच्चे का रुझान इस और बढ़ने लगा और उसने पिता के साथ मिलकर प्रैक्टिस करनी शुरू कर दी।।लेकिन पिता पुत्र को किसी प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए अर्जुन के दस वर्ष का होने तक इंतजार करना पड़ा क्योंकि इसी उम्र में कोई शूटिंग के लिए पात्र बनता है और यह मौका उन्हें इस वर्ष मिला।

