
मथुरा वृंदावन से विस्तृत रिपोर्ट :
पांवटा साहिब से गए 45 यात्रियों की मथुरा वृंदावन यात्रा यादगार बन गई। नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष और कृष्ण प्रेमी संजय सिंघल के तत्वाधान में पांवटा से मथुरा वृंदावन यात्रा 9 अप्रैल को सुबह 7:00 बजे पांवटा साहिब से यात्रा रवाना हुई। यात्रा संयोजक नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष संजय सिंघल ने पूजा अर्चना की। इसके बाद यात्रा शुरू हुई। ये यात्रा पांवटा मेरठ, ग्रेटर नोएडा, होते हुए शाम को 7:00 बजे सुखधाम रिसोर्ट में पहुंची। जो वृंदावन के पास ही है। इसके बाद सभी यात्रियों ने रात्रि विश्राम किया।

पहला दिन ;
10 अप्रैल को सबसे पहले कीर्ति मंदिर में पहुंचे। ये राधा रानी की माता का मंदिर है उसके बाद राधा रानी मंदिर में पहुंचे जो की बरसाना में स्थित है यहां पर दर्शन करने के बाद सभी श्रद्धालु गोवर्धन की परिक्रमा लंबी होने के चलते ऑटो से ही करने निर्णय लिया। गोवर्धन पहुंचने के ऑटो रिक्शा से सबसे पहले राधा श्याम दोनों कुंड में सभी श्रद्धालुओं ने स्नान किया। इसके पश्चात 21 किलोमीटर की परिक्रमा की। इस दौरान कई मंदिर के दर्शन किए। उसके बाद वैष्णो देवी मंदिर पहुंचे। यहां पर सरकार की ओर से चारों धाम का बहुत बेहतरीन तरीके से निर्माण किया गया है इसके बाद सभी श्रद्धालु वापस रात 9 बजे रिसोर्ट पहुंचे।

11 अप्रैल को श्रद्धालुओं को लेकर बस सबसे पहले श्री कृष्ण जन्म भूमि के दर्शन किए। इसके बाद ब्रह्मांड मंदिर और चिंताहरण मंदिर आदि कई मंदिरों के दर्शन किए। इसके बाद श्री बांकेबिहारी दर्शन के बाद भारी बारिश के बाद भीगते भीगते वापस सुखधाम रिजॉर्ट पहुंचे।
12 अप्रैल को सुबह ही वृंदावन में स्थित
गोविंद देव मंदिर के दर्शन किए। ये औरंगजेब ने तोड़ा था और उसकी जगह पर कलंदरी मस्जिद बनवाई थी। गोविंद देव मंदिर, वृंदावन के सात प्रमुख मंदिरों में से एक है और आमेर के राजा मान सिंह ने 1590 में इसका निर्माण करवाया था। 1669 में, औरंगजेब ने इस मंदिर को ध्वस्त कर दिया और इसकी जगह पर एक मस्जिद बनवाई, जिसे स्थानीय लोग कलंदरी मस्जिद कहते हैं। इसके बाद निधिवन पहुंचे। ये एक पवित्र और रहस्यमय धार्मिक स्थान है, जहां यह माना जाता है कि भगवान कृष्ण और राधा रासलीला करते हैं। यह स्थान उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित है। निधिवन में पेड़ों की डालियाँ नीचे की ओर झुकी हुई हैं, जो आपस में गुंथी हुई प्रतीत होती हैं, और यह भी माना जाता है कि निधिवन में रात में होने वाली रासलीला को देखने वाला किसी को भी बता नहीं सकता।
इसके बाद शाम को एस्कॉन मंदिर और प्रेम मंदिर पहुंचे। 13 अप्रैल को सभी कृष्ण प्रेमी वापस लौट रहे हैं।

लेखक यात्री : श्यामलाल पुंडीर पत्रकार दैनिक भास्कर एवं संपादक देश की आवाज न्यूज चैनल पांवटा साहिब जिला सिरमौर हिमाचल प्रदेश Mo.9418059999
