Breaking
Tue. Jan 13th, 2026

एक ही परंपरा: गिरिपार – जौनसार , इसलिए भी बनता ST का हक

एक ही परंपरा: गिरिपार – जौनसार , इसलिए भी बनता ST का हक
Oplus_131072

पांवटा साहिब:( श्यामलाल पुंडीर)

गिरिपार और जौनसार बाबर की एक ही परंपरा हैं इसलिए भी मांग रहे हैं जनजाति का दर्जा। दोनों क्षेत्र में रहन सहन, वेश भूषा, रीति रिवाज और कई परंपरा एक जैसी है। अब माघी त्यौहार भी दोनों क्षेत्रों में मनाया जाता है। समूचे ट्रांसगिरी क्षेत्र, शिमला और सोलन जिले के कुछ क्षेत्र और उत्तराखंड के जौनसार बाबर क्षेत्र में माघी त्योहार शनिवार से धूमधाम से मनाया जा रहा है।
ये त्यौहार प्रति वर्ष 28 गते पोश में मनाया जाता है।

इस दिन हर घर में बकरा काटा जाता है। यह हाटी संस्कृति का मुख्य हिस्सा है।यह त्योहार जिला सिरमौर के ट्रांसगिरी क्षेत्र की 144 पंचायतों में से लगभग 125 पंचायतों में मनाया जाता है। 125 पंचायतो में इसकी कीमत करोड़ो रुपयों की आंकी गयी है। इसके अलावा शिमला जिले के जुब्बल ओर उत्तराखंड के जौनसार में मनाया जाता है।

हालांकि जुब्बल में इससे पोश महीने के शुरू में ही मनाया जाता है। शिमला में इसे ट्रांसगिरी ओर उत्तराखंड की तर्ज ओर एक दिन ही नही मनाया जाता। वहां यह त्योहार कई दिनों तक चलता है। लेकिन ट्रांसगिरी ओर उत्तराखंड में यह त्योहार एक ही दिन 28 गत्ते को मनाया जाता है।

मान्यता है कि ये पर्व दैवीय शक्ति से भी जोड़ा गया है। त्योहार वाले दिन सुबह पहले अपनी अपनी कुल देवी( ठारी, डुंडी, कुजयाट, काली) के नाम का आटे ओर घी का खेन्डा हलवा देवी का चढ़ाया जाता हैं। उसे बाद बकरा को काटने से पहले देवी देवता की अनुमति ली जाती है।
उसके पश्चात ही बलि दी जाती है। उस दिन क्षेत्र में सभी व्यवसाय बन्द रहते है और सभी कर्मचारी छुटी पर रहते है। इस त्योहार के भी कई रीति रिवाज है।

शुक्रवार को पहले दिन बोषता मनाया गया। इस दिन पक्का खाना (बेड़ोली) बनाया जाता है। त्योहार वाले दिन को भातियोज कहा जाता है। उसके बाद ओर मकर संक्रांति से पहले वाले दिनों को साजा कहा जाता है। त्योहार का हिस्सा सभी रिश्तेदारी, ब्याही हुई लड़कियों को दिया जाता है। हर परिवार अपनी ब्याही हुई लड़की के वहां उसका हिस्सा लेकर जाते है। हिस्से के तौर पर गुड़ ले जाया जाता है। पूरे माघ के महीने में हर गांव में नाटी लगती है। लेकिन यह अब कुछ एक गांव में रह गई है। अधिकतर लुफ्त हो चुकी है।

ये भी मान्यता है कि इस पर्व पर बकरा काटा जाता है तथा मां काली के नाम की कड़ाही चढ़ाई जाती है। बुर्जुगों के मुताबिक मां काली पूरे साल उनकी हर कष्टों से रक्षा करती है। इस पर्व को लेकर क्षेत्र के लोगों मे उत्साह रहता है। अहम यह है कि इस पर्व के लिये घर से बाहर रोजी रोटी के जुगाड़ में व नौकरी कर रहे नौकरीपैशा लोग भी घर जरुर आतें है। इससे परिवार मिलन भी हो जाता है और पर्व भी मनाया जाता है।

यह माघी त्योहार गिरिपार क्षेत्र के आंज भोज, शिलाई, संगडा़ह, राजगढ़, कमरउ, उपतहसील रोनहाट तथा पांवटा तहसील की आंजभोज की पंचायतों के अलावा उत्तराखण्ड के जोंसार बाबर और शिमला जिले मे बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। पर्व के पहले दिन दूर दूर से नौकरीपैशा लोग परिवार समैत अपने घर पंहुचते है। पूरा परिवार मिलकर पारंपरिक व्यंजनों का लुत्फ उठाता है तथा मिल-जुलकर इस पर्व को मनाया जाता है। इस दौरान एक माह तक मेहमाननवाजी और गीत संगीत का दौर भी चलता रहता है।

जौनसार बाबर में भी शनिवार से होगी माघ मरोज पर्व की शुरूआत

उत्तराखंड : जौनसार बावर में लोक पर्व माघ मरोज की शनिवार से शुरूआत हो जाएगी। इसके अलावा क्षेत्र की कई खतो में रविवार से पर्व मनाया जाएगा।

जौनसार बावर के खत बमटाड़,
पशगांव, कनयाण में शनिवार से विधिवत
पर्व की शुरूआत हो जाएगी जबकि खत
सिलगांव, बाना, विशायल, पंजगांव,
शिली, उपलगांव, शैली सहित अन्य कई
खतों में पर्व 12 जनवरी से मनाया जाएगा।

उधर पर्व की खरीदारी के लिए साहिया
बाजार में पूरे दिन भारी भीड़ उमड़ी रही।

बकरों की हुई खरीददारी
बाजार में आवश्यक सामान की खरीददारी करने आए लोगों ने बकरों की भी जमकर खरीद की बाजार स्थित मंडी स्थल के पास, चकराता रोड, समाल्टा रोड पर व्यापारियों ने पहले से ही बकरे लाकर बांधे हुए थे। ग्रमीण क्षेत्रों से बाजार आ रहे लोग भारी संख्या में बकरों की खरीददारी करते दिखाई दिए।

Related Post