Breaking
Mon. Apr 20th, 2026

अंतिम संस्कार की ये परंपरा छोड़ रहे पारसी, क्या है कारण..पारसी थे रतन टाटा

अंतिम संस्कार की ये परंपरा छोड़ रहे पारसी, क्या है कारण..पारसी थे रतन टाटा
Oplus_131072

पारसी समुदाय में दखमा यानी ‘टावर ऑफ साइलेंस’ में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को दोखमेनाशिनी कहा जाता है। दखमा एक गोलाकार बनावट होती है जहा शव को रखा जाता है। इसमें शव को खुले में, सूरज की रोशनी में रखा जाता है ताकि गिद्ध उसे खा सकें।

देश में गिद्ध की संख्या लगातार घट रही है। जो शव को खाते थे। यहीं कारण है कि रतन टाटा का अंतिम संस्कार शव इलेक्ट्रिक शव गृह में जलाया गया।

कल पद्म विभूषण रतन टाटा के देहांत की खबर सामने आने से बाद से ही हर कोई उदास है। पूरे देश में शोक की लहर है। पद्म विभूषण रतन टाटा का पूरा जीवन लोगों के लिए प्रेरणा रहा है। करोड़ों की संपत्ति के मालिक होने के बाद भी वह हमेशा से सादगी भरा जीवन जीते आए।

उन्होंने अपने जीवन में कई ऐसे काम किए, जिनकी वजह से उनके जाने के बादे भी हमेशा उन्हें याद किया जाएगा। वह एक दयालु और सरल स्वभाव वाले व्यक्ति थे। हालांकि, उन्होंने अपना पूरा जीवन अकेले ही बिताया। उन्होंने कभी शादी नहीं की और जीवनभर कुंवारे ही रहे।

हालांकि, उन्हें चार बार प्यार जरूर हुआ था। उनका एक रिश्ता तो लगभग शादी तक पहुंच गया था, लेकिन अचानक शादी होते-होते रुक गई। इस बारे में खुद पद्म विभूषण रतन टाटा ने खुलासा किया था।

फेसबुक पर ‘ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे’ से बात करते हुए टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन ने अपने निजी जीवन के बारे में यह हैरान करने वाला खुलासा किया था।

आइए जानते हैं क्या है पूरी कहानी-
बचपन में ही अलग हो गए माता-पिता
उन्होंने बताया था कि उनका बचपन खुशहाल था, लेकिन जैसे-जैसे वह और उनके भाई बड़े होते गए, उन्हें अपने माता-पिता के तलाक के कारण व्यक्तिगत परेशानी का सामना करना पड़ा, जो उन दिनों आज की तरह आम नहीं था। बता दें कि जब रतन टाटा छोटे थे, तभी उनके माता-पिता, नवल टाटा और सूनी एक-दूसरे अलग हो गए थे और इसके बाद उनका पालन-पोषण उनकी दादी नवाजबाई ने किया था।

वहीं, अपनी लव लाइफ पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि मैं एलए (लॉस एंजिल्स) में था, जहां मुझे प्यार हुआ और लगभग शादी भी हो गई
दादी के लिए किया वापस लौटने का फैसला हालांकि, इसी बीच उन्होंने अस्थायी तौर पर वापस भारत जाने का फैसला किया था, क्योंकि वह अपनी दादी से दूर थे, जिनकी तबीयत लगभग 7 साल से ठीक नहीं थी।

इसलिए वह दादी से मिलने वापस भारत आ गए। हालांकि, इस दौरान 1962 के भारत-चीन युद्ध चल रहा है, जिसकी वजह से उनकी पार्टनर के माता-पिता को उनका भारत आना मंजूर नहीं था और बस इस वजह से रतन का वह रिश्ता टूट गया। रतन टाटा ने बताया कि वह चार बार शादी के करीब पहुंचे, लेकिन हर बार वह डर या किसी न किसी कारण से पीछे हट गए।

इस दौरान उन्होंने यह भी बताया अपने पिता के साथ उनके अक्सर मतभेद रहा करते थे। उन्होंने बताया कि वह अमेरिका में कॉलेज जाना चाहते थे, लेकिन उनके पिता ने यूके में जाने पर जोर दिया। मैं एक आर्टिकेक्ट बनना चाहता था, उन्होंने मुझसे इंजीनियर बनने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि उनकी दादी ने हमेशा उन्हें यह सिखाया कि बोलने का साहस नरम और सम्मानजनक भी हो सकता है।

Related Post