पौराणिक कथाओं के मुताबिक, भद्रा सूर्य – छाया की पुत्री और शनि की बहन हैं। भद्रा का स्वभाव बने-बनाए काम को बिगाड़ने का था । भद्रा शुभ कामों में बाधा डालती थीं। भद्रा की वजह से चिंतित सूर्य ने ब्रह्मा जी से मदद मांगी।
ब्रह्मा जी ने भद्रा को समझाते हुए कहा था कि अगर कोई व्यक्ति तुम्हारे काल यानी समय में शुभ काम करता है तो तुम उसमें बाधा डाल सकती हो, लेकिन जो लोग तुम्हारा काल छोड़कर शुभ काम करेंगे, तुम्हारा सम्मान करेंगे, तुम उनके कामों में बाधा नहीं डालोगी। इसी कथा की वजह से भद्रा के समय को छोड़कर शुभ काम करने की परंपरा चली आ रही है। आज रक्षाबंधन का शुभ समय इसलिए 1:30 बजे के बाद होगा।
मृत्युलोक की भद्रा विशेष अशुभ व हानिकारक
यदि भद्रा वाले दिन चंद्र कर्क, सिंह, कुंभ व मीन राशि में स्थित हो तो भद्रा का निवास मृत्युलोक रहता है। मृत्युलोक की भद्रा विशेष अशुभ व हानिकारक मानी जाती है। इसमें सभी प्रकार के शुभ कार्य वर्जित होते हैं।
यदि भद्रा वाले दिन चंद्र मेष, वृषभ, मिथुन व वृश्चिक राशि में स्थित हो तो भद्रा का निवास (स्वर्ग लोक) एवं भद्रा वाले दिन चंद्र कन्या, तुला, धनु व मकर राशि में स्थित हो तो भद्रा का निवास (पाताल लोक) में रहता है। स्वर्ग लोक एवं पाताल लोक निवासरत भद्रा विशेष अशुभ नहीं होती।
मध्यान्ह काल के उपरांत भद्रा विशेष अशुभ नहीं होती।
शुक्ल पक्ष की चतुर्थी व एकादशी तथा कृष्ण पक्ष की तृतीया व दशमी तिथि वाली भद्रा दिन में शुभ होती है, केवल रात्रि में अशुभ होती है। शुक्ल पक्ष की अष्टमी व पूर्णिमा तथा कृष्ण पक्ष की सप्तमी व चतुर्दशी तिथि वाली भद्रा रात्रि में शुभ होती है, केवल दिन में अशुभ होती है।
जबकि कोर्ट-कचहरी, मुकदमे, चिकित्सा, शत्रु पराभव कार्य, चुनावी नामांकन, वाहन क्रय इत्यादि में भद्रा दोष मान्य नहीं होता।

