इस बार लोकसभा चुनाव में दो ऐसे निर्दलीयों ने जीत दर्ज की है जो फिलहाल जेल में हैं। देशद्रोह के आरोप में असम की जेल में बंद खालिस्तान समर्थक अमृतपाल
सिंह ने पंजाब के खडूर साहिब से जीत दर्ज की है।
वहीं दूसरी ओर टेरर फंडिंग व एनएसए के तहत तिहाड़ जेल में बंद शेख अब्दुल राशिद इंजीनियर उत्तरी कश्मीर
लोकसभा सीट से सांसद चुने गए हैं। अब सवाल उठ रहे हैं कि इनकी शपथ कैसे होगी। संविधान एक्सपर्ट के अनुसार रिप्रेजेंटेशन आफ पीपुल एक्ट के तहत जो प्रत्याशी
चुनाव जीतता है, उसे शपथ भी लेनी होती है। अगर कोई जेल में बंद है तो उसे स्पेशल कस्टडी पैरोल या कोर्ट से जमानत पर इसके लिए छोड़ा जाता है। ऐसा पहले भी हो चुका हैं।
कई उदाहरण हैं। वर्ष 2020 में बसपा नेता अतुल राय को संसद सदस्य की शपथ लेने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पैरोल दी थी। 2022 में शपथ के लिए सपा
विधायक नाहिद हसन को जमानत दी गई थी। लेकिन अगर कोई सांसद या विधायक आपराधिक मामले में दोषी पाया जाता है तो उसे तुरंत पद छोड़ना होगा।
इसके अलावा सांसद को विशेषाधिकार प्राप्त है कि उन्हें सत्र में भाग लेने से रोका नहीं जा सकता। ऐसे में जब सत्र चल रहा होगा तो जेल में बंद अमृतपाल सिंह और राशिद इंजीनियर कोर्ट की अनुमति से संसद सत्र में भाग ले सकेंगे। लेकिन जनता के काम करना थोड़ा मुश्किल होगा। आरोपी को जेल मैन्युअल के अनुसार चलना होता है। वे अपने पत्र जेल से भेज सकते हैं। संसद में ऑनलाइन सवाल भिजवा सकते हैं, पर सांसद के सभी काम करने सक्षम नहीं होंगे।

