हिमाचल प्रदेश में 6 बागियों की वजह से कांग्रेस में उठा सियासी तूफान फिलहाल तो शांत नहीं हो रहा है। अब कांग्रेस के 6 बागी विधायक, 3 निर्दलीय और 2 बीजेपी एमएलए हरियाणा से उत्तराखंड की ओर हेलीकॉप्टर से रवाना हुए है। यह सभी विधायक ऋषिकेश से 30 किलोमीटर दूर एक होटल में रुके हुए हैं।
इसलिए अभी हिमाचल की कांग्रेस सरकार पर खतरा मंडरा रहा है। हालांकि यह खतरा कितना है। ये सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही पता चलेगा। यह खतरा इसलिए भी है कि कांग्रेस के 2 ऑब्जर्वर ने हिमाचल की एकमात्र राज्यसभा सीट में अभिषेक मनु सिंघवी की हार के लिए सीएम समेत, कांग्रेस अध्यक्ष आदि कई नेताओं को जिम्मेदार ठहराया है।
ऐसे बची थी कांग्रेस सरकार
पहला कारण तो यह था कि विधानसभा अध्यक्ष ने पूर्व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर समेत 15 विधायकों का निष्कासन कर दिया जिस कारण बजट सत्र में सरकार गिरने से बच गई।
दूसरा कारण यह है कि अगर विधायकों का निष्कासन नहीं करती तो 6 कांग्रेसी विधायक को व्हिप उल्लंघन करने पर निष्कासित किया जा सकता था।
तीसरा कारण यह है कि बागी विधायकों की संख्या कम होने के कारण दल बदल कानून लागू हो सकता था जिस कारण अभी तक सरकार बची हुई है। और अब विक्रमादित्य सिंह से रुख से ही स्पष्ट होगा।
अगर विधानसभा अध्यक्ष भाजपा विधायकों का निष्कासन नहीं करती तो विधानसभा में भाजपा के 25 और 6 बागी कांग्रेस और 3 निर्दलीय के साथ 34 का बहुमत होता जबकि कांग्रेस के पास 33 का बहुमत रह जाता क्योंकि विधानसभा अध्यक्ष तभी वोट डाल सकता है जब बराबर का मत पड़े। इसलिए बजट सत्र में ही कांग्रेसी सरकार बाल बाल बच गई है लेकिन अभी खतरा टला नहीं है।

