जिला सिरमौर के पांवटा साहिब से लगभग 5 किलोमीटर दूर घने जंगलों के बीच स्थित पंचायत पातलियों के एतिहासिक स्वयंभू पातालेश्वर महादेव मंदिर पांवटा भी उन शिव मंदिरों मे से एक है जहां महाशिवरात्रि पर हर साल भव्य आयोजन होता है। यहां पर महादेव का स्वंय-भू शिवलिंग है। जिसकी पूजा अर्चना वैसे तो हर रोज होती है। लेकिन हर सोमवार व महाशिवरात्रि के दिन तो यहां पर भक्तो की भारी भीड़ लगी रहती है।
मंदिर के इतिहास के बारे में जानकार बतातें है कि पहले यहां पर घना जंगल होता था। बाद में यहां के लोगो ने जंगल में कई फीट लंबा व चौड़ा शिवलिंग देखा। इसके बाद यहां पर मंदिर का निर्माण करवाया गया है। इस प्राचीन और पवित्र स्थल में अब हजारों की संख्या में दूर दूर से शिव भक्त आते है। हालांकि इस धार्मिक स्थान की अलग अलग मान्यता है। पहली मान्यता यह है कि यहां पर ऋषि पंतजलि ने भगवान शंकर की तपस्या की थी। उस समय यहां पर घना जंगल था। मान्यता है कि ऋषि की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शंकर यहां शिवलिंग के रूप में विराजमान हुए। पंतजलि नाम के कारण यहां का नाम बाद में पातालेश्वर पड़ा है। एक और मान्यता यह है कि यहां पर पांडवो ने भी कुछ समय बिताया। इस दौरान उन्होंने यहां पर शिव शंकर की पूजा अर्चना की।

