पांवटा साहिब: इतिहास में पहली बार बीजेपी की सरकार ने गोसंरक्षण हेतु गोसेवा आयोग का गठन कर निराश्रित गोवंश को संरक्षण देने की बात की है। लेकिन अभी भी प्रदेशभर में करीब 15,000 व जिला सिरमौर में करीब 1,000 गोवंश सड़कों पर है।
सीएम को सौंपे मांग पत्र में कहा गया है कि….
1. उत्तराखंड की तर्ज पर गोमाता को देवभूमि हिमाचल प्रदेश की राज्यमाता घोषित किया जाए तथा इसके लिए कठोर नीति के तहत सख्त क़ानून बनाया जाए.
2. प्रदेशभर की सड़कों से एक विशेष मुहीम के तहत समस्त गोवंश को तुरंत प्रभाव से गो-अभ्यारण्य में भेजा जाए जिसमे सभी प्रदेशवासी सहभागी बनें तथा गोअभ्यारन्यों को शेष बचा बजट जल्द जारी किया जाए ताकि उनमें जल्द 2,000 पशु रखने की व्यवस्था हो सके.
3. सीमान्त इलाके जिला सिरमौर के लिए एक नए गो-अभ्यारण्य की प्राथमिकता से शीघ्र स्थापना की जाए.
4. हिमाचल में भी हरियाणा की तर्ज पर गो-कास्ट व अन्य बाई-प्रोडक्ट्स की मशीनों के लिए सब्सिडी दी जाए ताकि बेरोज़गार युवा गोमाता को रोज़गार के लिए अपनाए.
5. गोबर से बने प्रोडक्टस (धुप, अगबत्ती, उपले, घृत) को राशन डीपो में बेचने का प्रावधान किया जाए जोकि आजकल बड़े शहरों में आनलाइन बिक रहे हैं.
6. गो-कास्ट को शमशान घाट में 40% इस्तेमाल किए जाने के सरकारी आदेश दिए जाएं जिसासे पेड़ व पर्यावरण बचेंगे.
7. गोबर से बनी वर्मी कम्पोस्ट व घनजीवामृत खाद को भी यूरिया खाद के साथ 20-40% कोटा देकर खाद केन्द्रों पर उपलब्द्ध कराया जाए.
8. हिमाचल की सभी काऊ-सेंचुरी में गोबर से CNG व बिजली के प्लांट स्थापित हों ताकि वे आत्मनिर्भर बनें.
9. पांवटा साहिब के एक चिकित्सक डाॅ रोहताष नांगिया जी ने घातक लम्पी वायरस की होमियोपैथी दवा ईजात की है कृप्या उसका जल्द ट्रायल कर सभी को उपलब्द्ध कराई जाए ताकि गोमाता की जान बच सके.
10. गोसंरक्षण की आवाज़ उठाने वालों को प्रताड़ित करना बंद किया जाए. पांवटा साहिब में गोसेवकों के खिलाफ दर्ज झूठे मामले ख़ारिज किए जाएं। इस दौरान गोसेवक सचिन ओबराय, नगर गोरक्षा प्रमुख अजय संसरवाल व गोसेवक अधिवक्ता शशिपाल चौधरी मौजूद रहे।

