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Thu. Jan 15th, 2026

पिछले साल सिल्क्यारा सुरंग में फंसे श्रमिको ने इस बार घर में जलाए दीप

पिछले साल सिल्क्यारा सुरंग में फंसे श्रमिको ने इस बार घर में जलाए दीप
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उत्तरकाशी में पिछले साल दीपावली के त्योहार के दिन सिलक्यारा सुरंग हादसा हुआ था। गत वर्ष दीपावली के दिन 12 नवंबर को तड़के 4-5 बजे भूस्खलन वाला हादसा हुआ था।

जिसके चलते सुरंग के अंदर फंसने से 41 श्रमिकों की दिवाली काली हो गई थी। हादसे के बाद कई श्रमिक काम पर लौटे। उनका कहना है कि आज भी उस दिन को याद कर उनकी रूह कांप जाती है। वह उस दिन को याद नहीं करना चाहते।

गौरतलब है कि चारधाम सड़क परियोजना में यमुनोत्री हाईवे पर निर्माणाधीन 4.5 किमी लंबी सिलक्यारा पोलगांव सुरंग में उस वक्त हादसा हो गया था। जब श्रमिक रात की शिफ्ट खत्म कर दिवाली के दिन बाहर आने वाले थे। भूस्खलन के कारण सुरंग का मुंह बंद होने से 41 श्रमिक अंदर फंस गए थे। अंदर फंसने वालों में लखीमपुरखीरी उत्तरप्रदेश के मंजीत भी एक थे।

फोरमैन के पद पर कार्यरत मंजीत ने बताया कि वह हादसे वाले दिन को याद नहीं करना चाहते, याद रखेंगे तो काम नहीं कर पाएंगे। बताया कि पिछली बार तो वह दिवाली नहीं मना पाए थे। लेकिन इस बार दिवाली के लिए वह छुट्टी लेकर घर आए हैं और 3 नवंबर को वापस जाएंगे। मिर्जापुर उत्तरप्रदेश के घरवासपुर गांव निवासी अखिलेश कुमार सुरंग में सर्वेयर के पद पर कार्यरत हैं।
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अखिलेश हादसे वाले दिन को याद कर सिहर उठते हैं। उन्होंने बताया कि वह दिवाली के लिए अपने गांव आ गए हैं और पूरा एक महीना छुट्टी पर रहेंगे। बताया कि हादसे के चार दिन बाद उनकी बेटी पैदा हुई थी, जिसका नाम उन्होंने भाग्यश्री रखा है।

बिहार निवासी सोनू शाह सिलक्यारा सुरंग प्रोजेक्ट में सीनियर इलेक्ट्रीशियन हैं, बताया कि वह उस दिन को याद नहीं करना चाहते, बताया कि अब वह सुरंग के अंदर नहीं बल्कि बाहर ही काम करते हैं।

एक अन्य क्रेन ऑपरेटर सुशील कुमार ने बताया कि वह हादसे के बाद पिता की बीमारी के चलते सिलक्यारा वापस नहीं लौटे हैं। लेकिन वह हादसे वाले दिन को कभी नहीं भूल सकते। बताया कि वह अब गांव में ही मजदूरी कर अपना परिवार पाल रहे हैं। सुशील ने बताया कि उन्होंने हादसे के बाद बचने की उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन जब चौबीस घंटे में ऑक्सीजन की सप्लाई शुरू हुई तो उम्मीद जग गई थी।

सिलक्यारा सुरंग में हादसे को एक साल हो पूरा होने जा रहा है। लेकिन एक साल बाद भी भूस्खलन का मलबा पूरी तरह नहीं हट पाया है। करीब 65 मीटर दायरे में गिरे मलबे को हटाने के लिए तीन निकासी सुरंग बनाई जा रही है। जिसमें से एक आरपार हो चुकी है, वहीं दूसरी आरपार होने के लिए दस मीटर शेष बची है। इसके बाद मलबे के मध्य में तीसरी निकासी सुरंग बनाई जाएगी। जिसके बाद मलबा हटाया जाएगा

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