नजाकत अली हाशमी प्रदेश प्रवक्ता ऑल हिमाचल मुस्लिमस आर्गेनाईजेशन मुस्लिम मंच के राष्ट्रीय संयोजक मुहम्मद अफजाल द्वारा धर्मशाला में मस्जिदों के बारे मे दिया गया ब्यान गलत एवं दुर्भाग्य पूर्ण है। जिस में उन्होने कहा कि कब्ज़ा करके बनाई गई मस्जिदों में नमाज़ पढ़ना सही नहीं है। ऐसा ब्यान देने से पहले उन्हें यह भी बताना चाहिये था कि हिमाचल प्रदेश में कौन सी मस्जिद ऐसी है जो किसी की भूमि पर नाजायज कब्ज़ा करके बनाई गई हो।
ऑल हिमाचल मुस्लिमस आर्गेनाईजेशन उनको यह चुनौती देता है कि पूरे प्रदेश में एक भी मस्जिद का नाम बताएं जो कब्जा करके बनाई गई हो। हर
मुसलमान यह जानता है कि किसी दूसरे व्यक्ति की जगह पर उसकी इजाज़त के बगैर नमाज पढ़ना भी सही नहीं है फिर कोई किसी दुसरे की जमीन पर कब्जा करके मस्जिद कैसे बना सकता है?
इसलिए हम यह बात पूरी तरह यकीन के साथ कह सकते हैं कि पूरे प्रदेश में कोई भी मस्जिद किसी दूसरे की ज़मीन
पर कब्जा करके नहीं बनाई गई है। इस प्रकार के व्यानात से लोगों में जानबूझ कर भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं और लोगों को गुमराह किया जा रहा है। यदि मुहम्मद अफजाल की जानकारी में कोई ऐसी मस्जिद आई हो तो वह पहले उसके बारे में लोगो को बतायें और यदि उनकी जानकारी में कोई ऐसी मस्जिद है
ही नहीं और न ही कोई ऐसी मस्जिद हो सकती है जो किसी और की ज़मीन पर नाजायज़ कब्जा करके बनाई गई हो तो यह बिना किसी उचित कारण के फत्वा देने का क्या मकसद है?
मुहम्मद अफजाल राष्ट्रीय संयोजक मुस्लिम मच को हमारी यह सलाह है कि इस किस्म के बेतुके ब्यान देकर प्रदेश के पुरअमन माहोल को खराब करने की कोशिश न करें।
वक्फ बोर्ड के बारे में दिया गया उनका ब्यान भी औछी राजनीती से प्रेरित है। क्योंकि वक्फ बोर्ड ही ऐसी
संस्था है जिस में मुसलमानों को भागीदारी मिल सकती है। तथा वक्फ संप्तियों से होने वाली आय मुसलिम
समुदाय के उत्थान में काम आ सकती है। इसलिए इस संस्था को भी केन्द्र सरकार अपंग बनाना चाहती
है जो कि मुसलामानों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ है। इसलिए पूर्ण मुस्लिम समुदाय वक्फ एक्ट के
संशोधन के लिए लाये गये इस नए विधेयक का विरोध करता। क्योंकि वक्फ की संम्पतियां वह सम्पतियां हैं
जोकि मुसलमानों ने अपने दुसरे मुस्लिम भाईयों के लिए दान की हैं इन में एक सम्पति भी किसी दुसरे
समुदाय के लागों द्वारा दान की हुई नहीं है। तो फिर मौजूदा संशोदन विधेयक के अनुसार वक्फ बोर्ड में
दूसरे धर्मों के लोगों को भी मम्बर बनाने की बात कही गई है। जोकि सरासर अन्याय है जब मुसलमानों की सम्पती मुसलमानो के लिए दान की गई है तो उसमें किसी दूसरे धर्म के लोगों को शामिल करने का क्या मतलब है।

