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हाटीयों में फिर जगी उम्मीद की किरण

हाटीयों में फिर जगी उम्मीद की किरण

जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र की करीब 155 पंचायतों को आजादी के सात दशक बाद उनका हक मिलने की उम्मीद जगी है। लोकसभा ने गिरीपार क्षेत्र के हाटीयों को जनजातीय करने वाले विधेयक को पहले ही पास कर दिया। अब इस महीने मानसून सत्र में राज्य सभा में पेश होना हैं।

इससे पहले केंद्रीय जनजाति मंत्री अर्जुन मुंडा ने हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के गिरीपार क्षेत्र को जनजातीय दर्जा देने का विधेयक संसद में रखा जिसे देश की संसद ने ध्वनि मत से पारित कर दिया। 14 सितंबर 2022 को केंद्रीय कैबिनेट ने इसे मंजूरी दे दी थी।

वर्ष 1967 में हिमाचल के साथ लगता उत्तरांचल के बाबर जौनसार इलाके को जनजाति का दर्जा दिया गया है। तब से लेकर आज तक गिरिपार क्षेत्र की जनता अपने हक की लड़ाई लड़ रही है। भारतीय जनता पार्टी ने गिरी पार की तीन लाख आबादी को यह तोहफा दिया ।

अनुसूचित जाति वर्ग द्वारा मांग की गई थी कि उन्हें एसटी में शामिल न किया जाए , जिसके चलते केंद्र सरकार द्वारा उन्हें बाहर रखा गया है।

14 सितंबर को केंद्रीय कैबिनेट ने हाटी विधेयक को मंजूरी दी थी। वही सिरमोर प्रवास के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और हिमाचल प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जिला सिरमौर के गिरी पार के हाटी कबीले को जनजाति का दर्जा देने का जिक्र किया था।

गिरिपार को जनजाति क्षेत्र घोषित करवाने का श्रेय शिलाई के पूर्व विधायक बलदेव तोमर को जाता है। हालांकि वह इस बार बलदेव तोमर कांग्रेस के प्रत्याशी हर्षवर्धन चौहान से चुनाव हार गए हैं। लेकिन वह समुदाय के लोगों का मुद्दा सिरे चढ़ा गए।

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