जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे है। नेताओं का लगातार बैठक का दौर जारी है। सोशल मीडिया पर भी कभी ये नेता टिकट में आगे चल रहा है कभी कोई आगे चल रहा है अभी टिकट की बात चल रही है और चुनाव लड़ने की बात हो रही है। चुनाव तक कौन मैदान में रहता है अभी भी भविष्य के गर्भ में है।
फिलहाल गिरीपार क्षेत्र के दो नेता शिमला समझौते को इंकार कर चुके हैं। कारण है कि इन दोनों नेताओं पर इलाके के लोगों का दबाव बढ़ चुका है। अब इन दोनो नेताओं को चुनाव लड़ना ही होगा क्योंकि अगर ये चुनाव नहीं लड़ते हैं तो भी इनका राजनैतिक कैरियर दांव पर लग चुका है।
पहले इन नेताओं ने शिमला जाकर ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी के सामने सब कुछ बयां कर दिया है। खरी खोटी भी सुनाई। क्या फर्क पड़ता है। जिसको उनकी ही बिरादरी के लोग काला नाग कह चुके हैं तब भी चुप रहे और उसी हीरपुर से उनको सबसे ज्यादा लीड मिली। कारण साफ है वो सुनने की क्षमता रखता है।
अब जब यह दोनों गिरिपार के नेता चुनाव लड़ने का ऐलान पहले ही कर चुके थे। फिर शिमला जाने की क्या जरूरत थी।
यह भी जनता सब जानती है कि ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी टिकट की दौड़ में सबसे आगे चल रहे है। लेकिन अब दोनों नेताओं की मजबूरी है कि चुनाव लड़ेगे। गिरीपार में रोशन लाल शास्त्री ने भी बैठक में निर्णय ले लिया और कसम खाई की चुनाव लड़ेगे। मनीष तोमर पहले ही कसम खा चुके हैं फिर भी शिमला गए।
मनीष तोमर ने उत्तराखंड के विकास नगर में एक खनन व्यवसाई घर में बैठक की इसमें इलाके के कांग्रेस और बीजेपी के लोग शामिल हुए। इलाके की कोर कमेटी की मीटिंग थी। जिसमें 26 लोग शामिल हुए। फिर मनीष तोमर ने बोला कि क्या मुझे चुनाव लड़ना चाहिए। फिर मनीष ने बोला कि मैं चुनाव लड़ रहा हूं। अब सवाल मदन मोहन शर्मा का है। उन्होंने सिर्फ टिकट मांगा हैं निर्दलीय का ऐलान नही किया है। अब देखते रहे। आगे आगे होता है क्या।

