पांवटा साहिब: गिरिपार क्षेत्र के भंगानी निवासी एंव बाहती समुदाय से ताल्लुक रखने वाले रोशन लाल शास्त्री किसी पहचान के मोहताज नहीं है। वह संस्कृत के प्रख्यात विद्वान है। जिन्होंने एक शिक्षक के तौर पर शिलाई के दूर्गम क्षेत्र में भी अपनी सेवाएं दी है।
जिनके परिवार का मकसद ही ईमानदारी के साथ जनसेवा है। इसके पिता स्वर्गीय मेहरचंद चौधरी 1992 में रामजन्म भूमि पर राम मंदिर निर्माण को लेकर कार सेवा कर लाठियां खा चुके है। जिनके चाचा स्वर्गीय कर्मचंद चौधरी पांवटा के विधायक के तौर पर अपनी ईमानदारी की मिसाल कायम कर चुके है।
अब खुद भी रोशनलाल चौधरी 15 साल की उम्र में अपनी पढ़ाई के दौरान संघ की शाखाओ में जाते रहे है। वहां से ही उनको देश के प्रति कर्तव्य जानने का मौका मिला। रोशन लाल चौधरी का जन्म 25 मार्च 1965 को गिरिपार क्षेत्र के भंगानी साहिब में माता स्वर्गीय भगवती देवी व पिता स्वर्गीय मेहरचंद चौधरी के घर हुआ।
अपनी प्रारंभिक शिक्षा भंगानी स्कूल में हासिल करने के बाद वह उच्च शिक्षा के लिए नाहन गए। उस वक्त आसपास कोई कालेज नहीं होता था। उन्होंने नाहन के संस्कृति विद्यालय से संस्कृत में स्नातक की शिक्षा हासिल की।
इस दौरान वह नाहन के रानीताल में संघ की शाखाओ में भी जाते थे। पढ़ाई पूरी करने के बाद उनकी जेबीटी शिक्षक के तौर पर नियुक्ति हुई। वर्ष 1987 के बाद से वह शिक्षक के तौर पर विभिन्न स्थानो पर अपनी सेवाएं दे रहे है।
वह शिलाई के दूर्गम क्षेत्र बकरास, जरवा जुनैली व डाहर में व इसके बाद 2002 से 2010 तक वह आंज-भौज के अंबोया स्कूल में भी अपनी सेवाएं दे चुके है।
साफ छवि के चलते शास्त्री को पांवटा की जनता उनको विधायक देखना चाहती है।
हांलाकि रोशनलाल चौधरी को 2023 में सेवानिवृत होना था। लेकिन लोगो की सेवा के लिए उन्होंने वीआरएस ले ली है। और राजनीति के मैदान में उतर गए है।उनके समर्थन में बड़ी बड़ी जनसभा भी चुकी है। बाहती बिरादरी से ताल्लुक रखने के कारण उनको बिरादरी का भी अच्छा समर्थन मिल रहा है। उनकी बैठको और जनसभाओं में भीड़ उमड़ रही है। साफ छवि होने के चलते इनके लिए भाजपा व संघ के नेता भाजपा का टिकट दिलवाना चाहते है।
अगर भाजपा इनको टिकट देती है तो पुराने भाजपा के नेता व पांवटा के वरिष्ठ भाजपा नेता भी इनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे। पांवटा विधानसभा क्षेत्र में बाहती समाज का अच्छा वोट बैंक है। इसके अलावा सभी समुदाय के लोगो की पहली पसंद बन चुके है।
उन्होंने कहा कि जनता ने उनको राजनीति के मैदान में उतारा दिया है। अगर पांवटा सीट से भाजपा का टिकट नहीं मिला तो ठीक है। नही तो वह निर्दलीय मैदान में उतरेंगे। उन्होंने कहा कि पांवटा विधानसभा क्षेत्र में ऐसे कई विकास के काम है जो अधूरे है।

