देश के कई राज्यों से होकर आज पांवटा साहिब पहुंची। गौरक्षा जनजागरण भारत यात्रा के गौसेवक आज
प्रातः 10 बजे पीडब्ल्यूडी विश्राम गृह में पत्रकारवार्ता को संबोधित करेंगे। इसके बाद ये यात्रा उत्तराखंड के लिए रवाना होगी। गौरतलब है कि प्राचीनकाल से भारतवासी गो-धन को ही मुख्य धन मानते और हर प्रकार से गोरक्षण, गो-संवर्धन और गो-पालन करते थे। वेदों से लेकर सभी ग्रंथों में गो-महिमा और गो-पालन के उपदेश और गोपालकों के इतिहास भरे हैं।
वाल्मीकि-रामायण, महाभारत, श्रीमद्भागवत आदि ग्रंथों से पता लगता है कि एक-एक बार में एक साथ लाखों गायों का दान किया जाता था। राजा नृग ने कहा है कि ‘मैंने न्याय से प्राप्त बछड़ों सहित असंख्य गाएं दान की थीं। जैसे पृथ्वी के धूलिकण, आकाश के तारे और वर्षा की जलधाराओं को कोई गिन नहीं सकता, वैसे ही उनकी भी कोई गणना नहीं की जा सकती और वे सभी गायें दुधार, नौजवान, सीधी, सुंदर, सुलक्षणा, कपिला और वस्त्रालंकारों से सजी हुई थी।’ (श्रीमद्भागवत)

