जिला सिरमौर के पांवटा साहिब उप मंडल में पांवटा साहिब -शिलाई पर एनएच पर पांवटा साहिब से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर सिरमौरी ताल गांव स्थित है। इस गांव के ग्रामीण बुधवार की वो काली रात कभी नहीं भूल पाएंगे। बादल फटा और इसके साथ अचानक पहाड़ से बड़े बड़े पत्थर, पेड़ और मलबा आता है। और फिर लोगों के आखों के सामने सब तहस नहस हो जाता है। जान बचाने को लोग इधर उधर भागते है।
इस घटना में दुखों का पहाड़ तो विनोद के परिवार पर टूटा है। जिनके पिता कुलदीप सिंह 63 साल का शव बरामद किया जा चुका है। तथा 8 वर्षीय पुत्री दीपिका का शव भी बरामद किया जा चुका है। लेकिन विनोद की मां जीतो देवी 57 साल और पत्नी रजनी 31 साल व पुत्र नितेश 10 साल का कोई पता नहीं है। इनकी तलाश कल होगी।
बादल फटने से गांव के कुलदीप का मकान मलबे में समा जाता है। ग्रामीणों के खेतों में मलबा पूरी तरह से फसलों को बर्बाद कर चुका था। 62 वर्षीय कुलदीप का बेटा विनोद किसी को छोड़ने गया था तो उसकी जान बच गई। जबकि कुलदीप के परिवार के 5 लोग मलबे के ढेर में दब गए। मकान पूरी तरह से मलबे के ढेर में समा चुका था।
गांव में अफरा-तफरी का माहौल था। लोग अपना घर छोड़कर ऊंची जगह एनएच पर पहुंच गए। आसपास के क्षेत्र मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को सुरक्षित ले जाने का प्रयास शुरू कर दिया। प्रशासन भी मौके पर पहुंच चुका था। गांव में पूरा अंधेरा था बिजली बंद हो चुकी थी। मोबाइल और टॉर्च के सहारे ग्रामीण एनएच हाईवे पर पहुंचे।
लेकिन एनएच दोनों तरफ बंद हो चुका था कच्ची ढंग में भी मलबा आ चुका था। जबकि इस गांव से 2 किलोमीटर पहले पांवटा साहिब की तरफ भी एनएच पूरी तरह से बंद हो चुकी था। रात को सड़क खोलने का प्रयास नहीं हो सकता था। कहीं और जगह जाने का रास्ता नहीं था फिर ग्रामीणों ने गांव के लोगों को एनएच तक पहुंचाया जहां पर सुरक्षित जगह थी
पूर्व ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी और पूर्व विधायक किरनेश जंग, एसडीएम और तहसीलदार रात को ही मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों को सुरक्षित जगह पहुंचाने का प्रयास शुरू हो गया था लेकिन एनएच नहीं खुला था। 2 किलोमीटर पैदल जाना पड़ा। मलबे में दबे लोगों को निकालने का प्रयास सुबह किया गया और सुबह डीसी सुमित खिमटा भी मौके पर पहुंच गए थे।

