आखिरकार लाखों लोगों की उम्मीदों पर महामहिम राष्ट्रपति द्रोपती मुर्मू ने मोहर लगा दी है। इसके लिए महामहिम का भी धन्यवाद। अब जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र की करीब 155 पंचायतों को 55 सालों के आदोलन के अब एसटी का दर्जा मिलने जा रहा है। पहले लोकसभा ने गिरीपार क्षेत्र के हाटीयों को जनजातीय करने वाले विधेयक को पहले ही पास कर दिया। फिर मानसून सत्र में राज्य सभा में पास हुआ। अब राष्ट्रपति ने इस पर अपनी मुहर लगा दी है।
कब क्या हुआ
14 सितंबर 2022 को केंद्रीय कैबिनेट ने इसे मंजूरी दे दी थी। इसके बाद केंद्रीय जनजाति मंत्री अर्जुन मुंडा ने हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के गिरीपार क्षेत्र को जनजातीय दर्जा देने का विधेयक संसद में रखा जिसे देश की संसद ने ध्वनि मत से पास किया गया।
गौरतलब है कि वर्ष 1967 में हिमाचल के साथ लगता उत्तरांचल के बाबर जौनसार इलाके को जनजाति का दर्जा दिया गया । तब से लेकर गिरिपार क्षेत्र की जनता अपने हक की लड़ाई लड़ रही थी।
अनुसूचित जाति वर्ग द्वारा मांग की गई थी कि उन्हें एसटी में शामिल न किया जाए , जिसके चलते केंद्र सरकार द्वारा उन्हें बाहर रखा गया है। लेकिन एससी और ओबीसी को पहले से मिल रहे आरक्षण कोई बदलाओं नही होगा।
14 सितंबर को केंद्रीय कैबिनेट ने हाटी विधेयक को मंजूरी दी थी। वही सिरमोर प्रवास के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और हिमाचल प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जिला सिरमौर के गिरी पार के हाटी कबीले को जनजाति का दर्जा देने का वायदा किया था वो पूरा कर दिया।
गिरिपार को जनजाति क्षेत्र घोषित करवाने का श्रेय शिलाई के पूर्व विधायक बलदेव तोमर को जाता है। हालांकि वह इस बार बलदेव तोमर कांग्रेस के प्रत्याशी हर्षवर्धन चौहान से चुनाव हार गए हैं। लेकिन वह समुदाय के लोगों का मुद्दा सिरे चढ़ा गए।

