हिमाचल के जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र के हाटी समुदाय को जनजाति का दर्जा देने वाले विधेयक को लोकसभा में मंजूरी मिलने के बाद आज राज्यसभा में भी मंजूरी मिल गई है। इसके बाद से गिरिपार में खुशी की लहर है। इस मांग के लिए हाटी समुदाय के लोग 5 दशकों से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश व अब उतराखंड के जौनसार बाबर क्षेत्र को एसटी दर्जा 1967 में मिल चुका है। तभी से इसी के साथ लगते क्षेत्र के हाटियों ने भी जनजाति की मांग तेज कर थी। वर्ष 1978 में हाटीयों ने तत्कालीन शिलाई के राजनेताओं से इसकी मांग उठाने के लिए आग्रह किया। मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद ट्रांसगिरि क्षेत्र के किलौड़ से लेकर राजगढ़ तक हाटी समुदाय के लोगों ने एकजुट होकर आंदोलन करने का निर्णय लिया। जनजाति का दर्जा देने के लिए समितियों का गठन किया गया। मांग उठाने के लिए प्रतिनिधिमंडल सरकार से मिला।
वर्ष1986 में केंद्र सरकार ने प्रदेश सरकार को हाटी जनजाति की रिपोर्ट पेश करने को कहा। गठित कमेटी ने अपनी रिपोर्ट प्रदेश सरकार को भेजी। जिसमें हाटियों की मांग को जायज बताया गया।
वर्ष1991 में विधानसभा ने सदन में हाटी को जनजाति का दर्जा देने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को अपनी सिफारिश भेजी। इसके बाद केंद्र के एससी और एसटी आयोग में जनजाति दर्जे की फाइल धूंल फांकती रही।
शिमला संसदीय क्षेत्र से सांसद वीरेंद्र कश्यप ने संसद में 4 बार हाटी समुदाय को जनजाति का दर्जा देने की मांग को उठाया। 20 दिसंबर 2012 को सांसद के नेतृत्व में हाटी समिति ने तब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की।
इसके बाद एसटी आयोग नेे सर्वे कराने के आदेश दिए। इसके लिए अर्पणा नेगी की अध्यक्षता में नई कमेटी बनाई गई। इसके बाद गृह मंत्री और नरेंद्र मोदी के सामने भी मांग उठाई गई।
नाहन में चुनावी सभा में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के हाटी समुदाय को जनजाति का दर्जा दिलाने के लिए दिए आश्वासन के बाद अब ट्रांसगिरी क्षेत्र के 1.60 लाख हाटियों की उम्मीदें जग गई थी।
ट्रांसगिरि के हाटी कबीले को लगता है कि अब उनके भी अच्छे दिन आने वाले है। इसके बाद अपनी मांगों को लेकर ट्रांसगिरी क्षेत्र में जगह-जगह बैठकों व दिल्ली सरकार से कई बार मिन्नतें कर चुकी हाटी समिति ने जनजाति की इस मांग को लेकर कई बार दिल्ली दरबार में फिर फरियाद की।
ट्रांसगिरी क्षेत्र में रहता है हाटी समुदाय
जिला सिरमौर के ट्रांसगिरी क्षेत्र के शिलाई विधानसभा क्षेत्र की तहसील शिलाई, रोहनाट व उप-तहसील कमरउ, पांवटा विधानसभा क्षेत्र के आंज-भौज क्षेत्र, रेणुका विधानसभा क्षेत्र की संगडाह, नौहराधार व पच्छाद विधानसभा क्षेत्र के राजगढ़ तहसील की कई पंचायतों में करीब 3 लाख हाटी समुदाय के लोग रहते है।
हाटी समिति के अनुसार हाटी समुदाय के लोग जनजाति दर्जे की मांग को लेकर 50 सालों से भी अधिक समय लगातार संघर्ष कर रहे है। हाटी लोग जौनसार बाबर की तर्ज पर जनजाति की मांग कर रहे थे लोगों का तर्क है कि जब ट्रांसगिरि के हाटियों व जौनसार बाबर क्षेत्र में रहने वाले जौनसारियों का रहन-सहन, धार्मिक परपंरा, खान-पान, रीति-रिवाज व पहरावा एक समान है एक जैसी भौगोलिक संरचना है तो फिर हाटियों को जनजाति के दर्जे से क्यों वंचित रखा गया था।

