हिमाचल के पूर्व सीएम शांता कुमार ने कहा कि इस ब्रह्मांड की रचना करने वाले ने पुरुष और नारी में परस्पर आकर्षण पैदा किया है। इस आकर्षण के कारण ही पुरुष और नारी का मिलन होता है और उससे सृष्टि होती है। यदि मिलन का यह आकर्षण न होता तो सृष्टि नहीं हो सकती थी।
विवाह उसे कहते हैं जिससे नया सृजन हो, समलैंगिक मिलन को विवाह नहीं कहा जा सकता। इसलिए विकृति का उपचार करें, उसे सम्मान मान्यता नहीं दी जा जाती।
पूर्व सीएम शांता कुमार ने कहा कि इस विकृति को समाज ने कभी मान्यता नहीं दी। यह एक विकृति अर्थात एक बीमारी है और बीमारी का उपचार किया जाता है, उसे सम्मान और मान्यता नहीं दी जाती।

