दिल्ली : चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे गुट को असली शिवसेना मान लिया है। आयोग ने आज शाम को शिंदे गुट को शिवसेना का नाम और तीर-कमान का निशान भी इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी। चुनाव आयोग ने पाया कि शिवसेना का मौजूदा संविधान अलोकतांत्रिक है।
उद्धव गुट ने बिना चुनाव कराए अपनी मंडली के लोगों को अलोकतांत्रिक रूप से पदाधिकारी नियुक्त करने के लिए इसे बिगाड़ा। चुनाव आयोग ने यह भी पाया कि शिवसेना के मूल संविधान में अलोकतांत्रिक तरीकों को गुपचुप
तरीके से वापस लाया गया, जिससे पार्टी निजी जागीर के समान हो गई।
इन तरीकों को चुनाव आयोग 1999 में नामंजूर कर चुका था। पार्टी की ऐसी संरचना भरोसा जगाने में नाकाम रहती है।
इसी के साथ महाराष्ट्र में शिवसेना से अब उद्धव गुट की दावेदारी खत्म मानी जा रही है।
गौरतलब है कि उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस और शरद पवार की पार्टी से गठबंधन कर सरकार बनाई थी और भाजपा से नाता तोड़ लिया था और अपनी विचारधारा से हट गए थे जिसके बाद शिंदे गुट ने बीजेपी से गठबंधन कर लिया। और भाजपा से मिलकर सरकार बनाई और वहां के मुख्यमंत्री रहे चुके बीजेपी नेता को उपमुख्यमंत्री बनाना पड़ा था और शिंदे को मुख्यमंत्री बनाया गया था।

