हिमाचल प्रदेश की पूर्व भाजपा सरकार में ऊर्जा मंत्री रहे सुखराम चौधरी बहुत बड़ी जीत के बाद भी क्यों खुश नहीं थे। आज हुई बद्रीपुर के शिव मंदिर धर्मशाला में समीक्षा बैठक में इसका खुलासा हो गया।

बैठक में पूर्व ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी देरी से पांवटा साहिब आए। लेकिन फिर भी उन्होंने बाद में कार्यकर्ताओं के साथ बात की और बैठक के बाद उन्होंने हर 103 बूथ की रिपोर्ट का आंकलन किया।
और भारतीय जनता पार्टी को 2017 में जिन बूथ पर ज्यादा वोट बीजेपी मिले थे लेकिन इस बार कम मिले हैं। उसका भी अध्ययन किया। जाहिर है ऊर्जा मंत्री की नजर एक बूथ पर नही होती। वो एक एक वोट पर नजर रखते है।
क्यों है पूर्व ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी नाखुश
कारण नंबर 1
वर्ष 2017 में सुखराम चौधरी 12619 वोट से विजय हुए थे। लेकिन इस बार 8596 वोटों से जीत दर्ज की। बीजेपी कार्यकर्ता और पदाधिकारी सब खुश हैं लेकिन ऊर्जा मंत्री 4023 वोट पर नजर रख रहे हैं। जो कम हुए। इसके अलावा नए वोट बनाए गए थे वह कहां गए। इस पर भी उनकी नजर है लेकिन पदाधिकारी इस बात को नहीं समझ रहे हैं और जीत के जश्न में लगे हुए हैं।
कारण नंबर 2
प्रदेश में ऊर्जा मंत्री रहते अगर काम किए हैं फिर भी उनके वोटों में कमी आई है इसका कारण क्या ऊर्जा मंत्री के प्रति लोगों की नाराजगी थी या मंडल प्रधान अरविंद गुप्ता के प्रति नाराजगी थी या फिर कार्यकर्ता अपना काम सही ढंग से नहीं कर पाए ये भी जांच का विषय है।
कारण नंबर 3
निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे मनीष तोमर को 3717 वोट पड़े। ये वोट कांग्रेस के थे या बीजेपी के यह भी जांच का विषय है।
कारण नंबर 4
रोशन लाल शास्त्री को 1872 वोट मिले। इनके साथ सुधीर गुप्ता और मदन मोहन शर्मा थे। लेकिन फिर भी इतने वोट तो ले गए।
कारण नंबर 5
रोशन लाल शास्त्री के अलावा बहाती बिरादरी से सुनील चौधरी को 896 वोट मिले यह किसके प्रति नाराजगी थी। पूर्व ऊर्जा मंत्री अच्छी तरह समझते हैं इसलिए मंडल अध्यक्ष और भाजपा के कार्यकर्ता समझे या ना समझे लेकिन पूर्व ऊर्जा मंत्री की इस पर नजर है कि आखिरकार 12619 वोटों से जीतने वाले सुखराम चौधरी 8596 से जीते है।
ये इसलिए कि शिलाई विधानसभा क्षेत्र में 382 वोट की कीमत बलदेव तोमर जान रहे हैं और ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी भी एक एक वोट की कीमत जानते हैं। वहीं दूसरी ओर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बन चुकी है अब विपक्ष की भूमिका निभानी होगी।
