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Thu. Apr 9th, 2026

हिमाचल में आधे से ज्यादा मंत्री हार जाते हैं चुनाव

हिमाचल प्रदेश में पिछले दो दशकों के चुनाव में अगर नजर डाली जाए तो हिमाचल प्रदेश में आधे से ज्यादा मंत्री फिर से विधानसभा नहीं पहुंच पाते और चुनाव हार जाते हैं।

2017 में 11 में से 3 मंत्री ही दोबारा पहुंचे विधानसभा वर्ष 2012-17 तक मुख्यमंत्री वीरभद्र सरकार में विद्या स्टोक्स, कौल सिंह ठाकुर, जीएस बाली, प्रकाश चौधरी, धनीराम शांडिल, अनिल शर्मा, कर्ण सिंह, मुकेश अग्निहोत्री, सुजान सिंह पठानिया, सुधीर शर्मा और ठाकुर सिंह भरमौरी मंत्री रहें।
इनमें से तीन मंत्री ही 2017 में दोबारा चुनाव जीत पाए, जबकि विद्या स्टोक्स नामांकन रद्द होने की वजह से मुकाबले
से बाहर हो गई। अनिल शर्मा भाजपा में शामिल हो गए और कर्ण सिंह का निधन हो गया। 5  मंत्री कौल सिंह ठाकुर, जीएसबाली, प्रकाश चौधरी, सुधीर शर्मा और ठाकुर सिंह भरमौरी चुनाव हार गए थे।

2007-12 तक मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के साथ जेपी नड्डा, नरेंद्र बरागटा, महेंद्र सिंह ठाकुर, सरवीण चौधरी, गुलाब सिंह ठाकुर, राजीव बिंदल, आईडी धीमान, किशन कपूर, रविंद्र रवि, खिमीराम, रमेश ध्वाला कैबिनेट
मंत्री रहें। इनमें से चार मंत्री नरेंद्र बरागटा, किशन कपूर, खिमीराम, रमेश धवाला चुनाव‌ हार गए, जबकि जेपी नड्डा केंद्रीय राजनीति में चले गए।

2007 में ये मंत्री नहीं पहुंच विधानसभा 2003-2007 तक मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के साथ विद्या स्टोक्स, कौल सिंह ठाकुर, कुलदीप कुमार, आशा कुमारी, रामलाल
ठाकुर, चंद्र कुमार, सिंघी राम, प्रकाश चौधरी, अनिल शर्मा, सत्त महाजन मंत्रीमंडल में रहें। इनमें से कुलदीप, रामलाल ठाकुर, चंद्र कुमार, सिंघी राम, प्रकाश चौधरी और सत महाजन 2007 में फिर से विधानसभा नही पहुंच पाए।

इस बार भी जयराम ठाकुर के मंत्रिमंडल में मंत्री सुरेश भारद्वाज, राकेश पठानिया के विधानसभा क्षेत्र बदले जाने के कारण इसकी स्थिति अच्छी नहीं मानी जा रही है।
वही उद्योग मंत्री विक्रम सिंह, शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर, स्वास्थ्य मंत्री राजीव सैजल, ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी और पूर्व मंत्री राजीव बिंदल भी कांटे के मुकाबले में फंसे हुए हैं।

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