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Fri. Apr 17th, 2026

जिसने राजा से हाथ जोड़कर मांगा था कॉलेज:उसको बाहर कर कांग्रेस ने मारी अपने पैरों पर कुल्हाड़ी

पांवटा साहिब: शिलाई कांग्रेस के नेता और पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष दलीप सिंह चौहान का निष्कासन करके कांग्रेस ने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार दी है। इसका खामियाजा कांग्रेस के उम्मीदवार हर्षवर्धन चौहान को इस चुनाव में उठाना पड़ सकता है। हाटी के मुद्दे पर सच बात रखने पर हर्षवर्धन की आखों की किरकिरी बने दलीप सिंह चौहान अब खुलकर हर्षवर्धन चौहान के विरोध में उतर गए है। जबकि दलीप सिंह चौहान ने अपने क्षेत्र के बच्चों को घर द्वार पर शिक्षा देने को राजा से हाथ जोड़कर कॉलेज मांगा था जो लोग आज तक नहीं भूले है।

गौरतलब है कि शिलाई विधानसभा के लाधी क्षेत्र की जनता कांग्रेस को नही, बल्कि दलीप सिंह चौहान को ही कांग्रेस पार्टी समझती है। कांग्रेस पार्टी ने लाधी क्षेत्र के मसीहा कहे जाने वाले दलीप सिंह चौहान पर पार्टी विरोधी गतिविधियों जैसे आरोप लगाकर 6 वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया। जबकि दलीप सिंह चौहान एआईसीसी सदस्य, जिला परिषद चेयरमैन के साथ स्थानीय पंचायत के निर्विरोध प्रधान भी रहे चुके हैं।

अब दलीप चौहान का पार्टी से निष्कासन शिलाई कांग्रेस के लिए नुकसानदायक साबित होने वाला है। शिलाई विधानसभा के लाधी क्षेत्र में दलीप सिंह चौहान युवा, महिलाएं , बुजुर्ग सहित सभी वर्गों में मृदुभाषी और मिलनसार व्यक्तित्व की छवि के चलते लाधी क्षेत्र से हर बार कांग्रेस को बढ़त देती आई है।

दलीप सिंह चौहान, गरीबों, असहायों सहित क्षेत्र के हर उस तबके के साथ रात दिन खड़े रहते है। दलीप चौहान की माने तो कांग्रेस पार्टी ने चौहान का नही बल्कि लाधी क्षेत्र की 12 पंचायतों का निष्कासन किया है। इसलिए जनता के निष्कासन का फैसला वह जनता पर ही छोड़ रहे है।

दलीप सिंह चौहान के जिला परिषद चेयरमैन बनने के बाद, विधायक हर्षवर्धन चौहान और दलीप चौहान, दोनों दिग्गज नेताओं के बीच छत्तीस का आंकड़ा शुरू हो गया, यह आंकड़ा इतनी दूरियां बना गया कि जैसे ही दलीप सिंह चौहान का जिला परिषद चेयरमैन वाला कार्यकाल पूरा हुआ तो शिलाई कांग्रेस मंडल ने दलीप सिंह चौहान को शिलाई मंडल से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

लेकिन एआईसीसी सदस्य होने के कारण प्रदेश कांग्रेस पार्टी के अंदर दलीप सिंह चौहान बने रहे। लाधी क्षेत्र के अंदर दलीप सिंह चौहान की अपनी मजबूत पकड़ है।

दलीप चौहान लोगों के चेहते माने जाते है। यदि दलीप चौहान का वोटर उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहता है तो शिलाई की राजनीति में बड़ा बदलाव होना संभव था। दलीप सिंह चौहान का निष्कासन से शिलाई कांग्रेस को कितना नुकसान होगा ये 8 दिसंबर को पता चल जाएगा।

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