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Wed. Apr 15th, 2026

आसन बैराज झील में प्रवासी परिंदों की दस्तक : कलरव करते पक्षियों से गुलजार हुई झील

पांवटा साहिब: हिमाचल व उतराखंड की सीमा पर स्थित आसन बैराज झील में इन दिनो कलरव करते पक्षीयों से गुलजार हो गई है। यहां पर मीलों दूर से आएं विदेशी मेहमान परिंदो ने दस्तक दे दी है। यहां पर हर साल सर्दी का मौसम शुरू होेते ही प्रवासी पक्षी यूरोप मध्य ऐशिया व साईबेरिया आदि देशो से यहां पर पहुंच रहे है।

क्योंकि सर्दियों के मौसम में विदेशो में झीलें व समुद्र सतह जम जाती हैं। जिस कारण हजारों मील दूर से प्रवासी परिंदे हर साल नवंबर में आसन झील में पहुंचते है। यह प्रवासी परिंदे पिछले हर साल यहां आते है। पिछले साल यहां पर 61 प्रजातियों के करीब 6000 परिदें हजारो मील दूर से यहां पहुंचे थे।

हिमाचल- उतराखंड सीमा पर पांवटा से करीब 3 किमी की दूरी पर भारत का यह पहला वेटलैंड कंजरवेशन रिजर्व है। यह 440.44 हेक्टेयर पर फैला हुआ है। यहां पर हर साल सर्दियों में विदेशी परिदें 2000 किमी से भी अधिक की दूरी तय कर पहुंचते हैं। इन दिनों हजारों मील दूर से सफर तय करने के बाद पांवटा समीप आसन बैराज में पहुंचे परिदों से झील गुलजार हो गई है।

आसन बैराज के अलावा उतराखंड व हिमाचल की सीमा के बीच बहती यमुना नदी में भी यह पक्षी डेरा डालते है। आसन बैराज वेटलेंड झील जो कि उतराखंड व हिमाचल की सीमा पर स्थित है। यहां पर व यमुना नदी में भी प्रवासी परिंदे पहुंचते है। विदेशी परिंदो की यहां पर कई प्रजातियां पहुंचती है।

जिसमें शेलडक पिनटेल्स रूडी यूरेशियन शावलरए रेड ग्रेस्टर पोचार्ड डक टफ्ड स्पाट बिल मोरगेन टील आदि प्रवासी पक्षी पहुंचते है। गौरतलब है कि मार्च अप्रैल तक यह प्रवासी पक्षी यही पर रहेगें। इसके बाद गर्मीयों का मौसम शुरू होते ही हिमाचल व उतराखंड की सीमा पर स्थित आसन बैराज झील व यमुना नदी के तट प्रवासी परिंद अपने वतन लौट जाएंगे।

पक्षी विशेषज्ञो के अनुसार यह स्थल विदेशी परिदों के लिए अनुकूल है। यहां पर विदेशी परिंदों की पसंद का हर भोजन इस झील में मौजूद रहता है। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले साल इस आसन वेट लैंड में 61 प्रजातियों के करीब 6008 परिदें प्रवास पर पहुंचे थे। गत तीन वर्षो की अपेक्षा इस बार विदेशी परिंदो की संख्या में इजाफा हुआ है।

इस आसन रिर्जव कंजरवेशन को वर्ष 2005 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने राष्ट्र को समर्पित किया था। यह कंजरवेशन भारत का पहला वेटलैंड कंजरवेशन रिजर्व है। यह 440.44 हेक्टेयर पर फैला हुआ है। यहां पर हर साल सर्दियों हजारों की संख्या में विदेशी परिदें 2000 किमी से भी अधिक की दूरी तय कर पहुंचते है।

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