सबसे पहले : देश की आवाज न्यूज पोर्टल की ओर से आप सभी को दीपों के पर्व दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं। प्रभु राम से प्रार्थना करते है। कि चैनल के पाठक और समस्त आम जन का जीवन सुखमय और मंगलमय हो। अब श्री राम की अयोध्या से लंका तक और वापसी की यात्रा की जानकारी सांझा कर रहे है।
1 अयोध्या जी- अयोध्या जी से श्रीराम ने वनवास यात्रा आरंभ की थी। अयोध्या से 20 किमी दूर तमसा नदी के तट पर उन्होंने पहली रात बिताई थी। साथ आए अयोध्यावासियों को वनवास से बचाने के लिए वे उन्हें यहीं सबको सोता छोड़कर चले गए थे।
2 श्रृंगवेरपुर- यह स्थान अयोध्या से लगभग 120 किलोमीटर की दूरी पर है। वर्तमान में इसे सिंगरोर कहते हैं। निषाद राज की नाव में बैठकर यहीं रामजी ने गंगा नदी पार की थी। यहीं से श्री राम ने सारथी सुमंत्र को वापस अयोध्या भेज दिया था।
3 प्रयाग- श्रृंगवेरपुर से 30 किमी दूर प्रयाग में गंगा-जमुना का संगम स्थल है। यहां श्रीराम भारद्वाज आश्रम में ठहरे थे।
भरद्वाजेश्वर शिवलिंग’ की पूजा-अर्चना की थी।
4 चित्रकूट: प्रयाग राज से ही श्रीराम ने संगम के समीप यमुना नदी को पार किया था।’ चित्रकूट प्रयाग से वे करीब 125 किमी दूर चित्रकूट पहुंचे। कामदगिरी पर्वत क्षेत्र में कुटिया बना कर रहे। श्रीराम का भरत से मिलाप यहीं हुआ था। वाल्मीकि आश्रम में वाल्मीकि जी से मिले थे। यहां सीता रसोई, रामघाट, राम शैया आज भी हैं।
5 पंचवटी- नासिक में गोदावरी नदी के तट पर पंचवटी है। यहीं पर सर्व तीर्थ है, जहां श्रीराम ने कुटिया बनाई थी और लंबे समय तक रहे। यहीं लक्ष्मणजी ने रावण की बहन शूर्पनखा की नाक काटी थी। यहीं से सीता जी का रावण ने अपहरण किया था।
6 दंडकारण्य- दंडकारण्य क्षेत्र चित्रकूट, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, आंध्रप्रदेश व महाराष्ट्र तक फैला है। यहां श्री राम ने 10 वर्षों तक भ्रमण किया। अनेक संतों के दर्शन किए थे।
7 किष्किंधा- कर्नाटक के हम्पी शहर के आसपास के इलाके और तुंगभद्रा नदी के किनारे का इलाका किष्किंधा राज्य में आता था। यहीं पर श्रीराम की भेंट हनुमानजी से हुई और यहीं उन्होंने बाली का वध किया था। यहीं वानर सेना तैयार की गई।
8 रामेश्वरम- तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में नल और नील के नेतृत्व में राम-सेतु बनाया गया था। आज भी इस राम-सेतु के अवशेष सागर में दिखाई देते हैं। यही से राम लंका पहुंचे।
9 लंका- यहीं राम-रावण का युद्ध हुआ था और श्रीराम ने रावण।वध किया था। वाल्मीकि रामायण व अन्य ग्रंथों के अनुसार रावण की लंका 100 योजन यानी 1250 किमी दूर थी। हालांकि रावण की लंका के बारे में कुछ विद्वानों के मत अलग हैं।
10 नंदीग्राम- श्रीराम लंका से पुष्पक विमान से अयोध्या के पास नंदी ग्राम लौटे। भरत ने यहीं से अयोध्या का राज संभाला था।
