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Wed. Apr 8th, 2026

राजनैतिक इतिहास : वर्ष 1952 से 2017 तक पांवटा साहिब में कौन जीता कौन हारा : किस बिरादरी के कितने वोट

पांवटा साहिब: जिला सिरमौर की पांवटा साहिब विधानसभा सीट पर कांग्रेस पार्टी ने किरनेश जंग को मैदान में उतार दिया है। पिछली बार कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार किरनेश जंग बीजेपी के सुखराम चौधरी से हार गए थे। जिस कारण इनके टिकट का पेंच फंस गया था लेकिन अब इनको टिकट मिल गया है। और पांवटा विधानसभा क्षेत्र से इस बार मुकाबला अब रोचक होने जा रहा है।

इस सीट पर भाजपा बाहती बिरादरी से तालुल्क रखने वाले को आजमाती रही हैं। जबकि कांग्रेस पहले सिख समुदाय और अब राजपूत राजपूत बिरादरी पर दांव खेल रही है।

इस बार भी कांग्रेस पार्टी ने राजपूत बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले किरनेश जंग को मैदान में उतारा है। जबकि बीजेपी ने बहाती बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले सुखराम चौधरी को मैदान में फिर से उतारा है।
किसके कितने वोट लगभग
इस विधानसभा क्षेत्र में सिख समुदाय के 9000 मुस्लिम समुदाय के 12000 बहाती समुदाय के 18000, पहाड़ी 17000 और राजपुत और अन्य बिरादरी के 22000 वोटर है।

इस सीट पर अगर वर्ष 1952 से नजर दौड़ाई जाएं तो यहां से 1952 में कल्याण सिंह जीते। 1967 में हितेंद्र सिंह का जनसंघ के वीरेंद्र चैहान के बीच मुकाबला हुआ था। हितेंद्र सिंह चुनाव जीत गए थे। 1972 में तपेंद्र सिंह जीते। 1977 में पहली बार कांग्रेस और जनता पार्टी को हराकर बाहती समुदाय के मिल्खराज निर्दलीय चुनाव जीते। उस वक्त सरदार रतन सिंह को 5081, जनता पार्टी के चंद्रमोहन को 4078 और मिल्खराज को 7643 वोट मिले थे।
इसके बाद 1982 में कांग्रेस ने सरदार रतन सिंह को टिकट काटकर नाहन के कुश परमार को दिया। उस वक्त कुश परमार को 10099, बीजेपी के मिल्खराज को 7747 और आजाद मैदान में उतरे सरदार रतन सिंह को 5942 वोट मिले।

1985 में फिर कांग्रेस के कुश परमार विजयी रहे। कुश परमार को 15203, कर्मचंद बीजेपी को 10429 वोट मिले।

1990 में भाजपा ने फतेह सिंह को मैदान में उतारा और वह विजयी हुए। फतेह सिंह को 19750 कुश परमार को 13854 वोट मिले। 1993 में कांग्रेस ने रतन सिंह को मैदान में उतारा उन्होने बीजेपी के फतेह सिंह हराया। रतन सिंह को 21238 और फतेह सिंह को 15648 वोट मिले।

1998 में पहली बार बीजेपी ने सुखराम चैधरी को मैदान में उतारा लेकिन वह हार गए। रतन सिंह को 15569 और सुखराम को 13149 वोट मिले। जबकि निर्दलीय किरनेश जंग को 12697 वोट मिले।

2003 में सुखराम पहली बार विधानसभा पहुंचे। उन्होंने कांग्रेस के रतन सिंह को हराया। सुखराम को 21900 और रतन सिंह को 16815 जबकि आजाद चुनाव मैदान में उतरे किरनेश जंग दूसरे नंबर पर रहे। उनको 17600 वोट मिले।

2007 सुखराम फिर से मैदान में उतरे और जीत गए। किरनेश को 24460 वोट और सुखराम को 29322 वोट मिले। जबकि बहुजन समाज पार्टी के मनजिंद्र सिंह विक्का को 7377 वोट मिले।

2012 में कांग्रेस ने सरदार ओंकार सिंह को मैदान में उतारा उनको 6152 वोट मिले। लेकिन जमानत नहीं बचा सके।इस दौरान निर्दलीय मैदान में उतरे किरनेश जंग चुनाव जीते। किरनेश जंग को 23713 और सुखराम को 22923 वोट मिले।

लेकिन 2017 में फिर बीजेपी के सुखराम जीत गए। सुखराम को 36011 और कांग्रेस किरनेश जंग को 23392 वोट मिलें। इस बार मुकाबला रोचक होने वाला है।

 

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