श्यामलाल पुंडीर संपादक की ग्राउंड रिपोर्ट
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने पांवटा साहिब में हुए अमृत महोत्सव कार्यक्रम में ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी को इशारों इशारों में टिकट की देने की बात कर दी थी और शनिवार को हुए राज्य स्तरीय यमुना शरद महोत्सव में अब जयराम ठाकुर मामा ने भांजों से उर्जा मंत्री सुखराम चौधरी के लिए आशीर्वाद मांगा है।
इसके अलावा सीएम द्वारा मंच ऊर्जा मंत्री की तारीफ की। क्योंकि मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय अध्यक्ष दोनों का साथ मिलने से अब ऊर्जा मंत्री में भी नई ऊर्जा आ गई है। गौरतलब है कि रोशन लाल शास्त्री और मदन मोहन शर्मा भी टिकट के दावेदार हैं।
शनिवार को ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी विरोधियों ने अलग से मुख्यमंत्री का स्वागत किया लेकिन मुख्यमंत्री ने गाड़ी से नीचे उतरना भी मुनासिब नहीं समझा। इसके अलावा तारूवाला में भी भारी संख्या में ऊर्जा मंत्री के समर्थक मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को शरद महोत्सव में बुलाकर ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं।
यह उनके विरोधियों के लिए करारा झटका है। गौरतलब है कि ऊर्जा मंत्री को चारों ओर से घेरने का प्रयास हो रहा है।
गिरीपार से रोशन लाल शास्त्री और आंज भोज से मनीष तोमर और शहर से मदन मोहन शर्मा ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। लेकिन अगर यही नेता 4 साल तक जनता के बीच रहते तो ऊर्जा मंत्री की मुश्किलें बढ़ सकती थी लेकिन अब सिर्फ टिकट के लिए सक्रिय होना जनता समझ रही है।
इसके अलावा पहला सर्वे ऊर्जा मंत्री सुखराम के पक्ष में गया था और अब जो नया सर्वे सामने आया है। उसके तहत जो निर्दलीय मैदान में उतरेगा उसके लिए मुश्किलें खड़ी हो जाएगी।
इसका कारण यह है कि अगर कोई निर्दलीय उम्मीदवार गिरिआर से होगा उसको गिरिपार इलाके में बहुत कम वोट मिलेंगे और गिरिपार से जो उम्मीदवारों होगा उसको गिरिआर से बहुत कम वोट मिलेंगे। पांवटा साहिब के कुल 103 बूथों में अगर किसी का वोट बैंक है तो वह भाजपा और कांग्रेस पार्टी का है।
अब देखना है कि ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी और किरनेश जंग के बीच मुकाबला किस मोड़ पर पहुंचता है यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।अगर कोई निर्दलीय एकजुट होकर आए तो पांवटा साहिब से निर्दलीय उम्मीदवार तीसरे नंबर पर भी आ सकता है लेकिन आम आदमी पार्टी अभी भी चौथे स्थान पर चल रही है। क्योंकि गिरिपार में आम आदमी पार्टी का वोट बैंक नही है। हालांकि चुनाव आचार संहिता के बाद समीकरण बदल भी सकते हैं।
