हिमाचल प्रदेश में 6 बागियों की वजह से कांग्रेस में उठा सियासी तूफान फिलहाल तो शांत हो गया है। ऐसा लगता है कि कांग्रेस सरकार कुछ समय के लिए बच गई है। लेकिन अभी भी खतरा मंडरा रहा है। यह खतरा इसलिए भी बाकी है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह पर हाईकमान क्या फैसला लेता है। अगर हाई कमान सीएम को कंटीन्यू रखता है तो विरोधियों का क्या रवैया रहेगा।
ऐसे बची सरकार
पहला कारण तो यह था कि विधानसभा अध्यक्ष ने पूर्व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर समेत 15 विधायकों का निष्कासन कर दिया जिस कारण बजट सत्र में सरकार गिरने से बच गई।
दूसरा कारण यह है कि अगर विधायकों का निष्कासन नहीं करती तो 6 कांग्रेसी विधायक को व्हिप उल्लंघन करने पर निष्कासित किया जा सकता था।
तीसरा कारण यह है कि बागी विधायकों की संख्या कम होने के कारण दल बदल कानून लागू हो सकता था जिस कारण अभी तक सरकार बची हुई है। अगर विक्रमादित्य सिंह अपने गुट का बहुमत बढ़ाते हैं तो ही सरकार जा सकती है।
अगर विधानसभा अध्यक्ष भाजपा विधायकों का निष्कासन नहीं करती तो विधानसभा में भाजपा के 25 और 6 बागी कांग्रेस और 3 निर्दलीय के साथ 34 का बहुमत होता जबकि कांग्रेस के पास 33 का बहुमत रह जाता क्योंकि विधानसभा अध्यक्ष तभी वोट डाल सकता है जब बराबर का मत पड़े। इसलिए बजट सत्र में ही कांग्रेसी सरकार बाल बाल बच गई है लेकिन अभी खतरा टला नहीं है।

