जिला सिरमौर के इस अस्पताल में कुछ डॉक्टरों के काले कारनामे ऐसे है कि आप सुनकर दंग रह जाएंगे। जागरूक आम आदमी अस्पताल और डॉक्टर के बारे में सब कुछ समझ जाएंगे। यह अस्पताल रेफर अस्पताल के नाम से जाना जाता है। छोटी-मोटी बीमारी के बाद भी यहां से मरीज को रेफर किया जाता है गरीब लोग दर-दर भटकते हैं। इसलिए काली पट्टी तो आम आदमी को डालनी चाहिए जो इलाज के लिए दर दर भटकते है।
पहली बात तो यह है कि सरकार भाजपा की हो या कांग्रेस की ये यहीं पर ही जमे रहते है। ये अस्पताल कई विधानसभा का केंद्र भी है। इस अस्पताल के कुछ डॉक्टर कमीशन खोरी का धंधा करते हैं। कुछ डॉक्टर सालों से यही जमे है।
एक और बात ये भी है कि अनावश्यक टेस्ट लिखते हैं और खुद ही प्राइवेट लैबोरेट्रीज के नाम बता कर वहीं से टेस्ट करवाने के लिए कहते हैं ताकि मोटी कमीशन मिल सके।
ये ग्रामीण क्षेत्रों में जाना नहीं चाहते इसका कारण यह है कि यहां पर प्राइवेट लैबोरेट्रीज में अल्ट्रासाउंड या अन्य टेस्ट जो होते हैं उसमें डॉक्टर की मोटी कमीशन है हालांकि ऐसे कुछ ही डॉक्टर है। कुछ निजी दवाई कंपनियों के कई मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के संपर्क में रहते हैं और महंगी दवाई लिखते हैं।
हैरानी की बात ये है कि हिमाचल का स्वास्थ्य विभाग भी इन डॉक्टरों को ग्रामीण क्षेत्र में भेजने में नाकाम रहा है। क्योंकि ऊंची पहुंच के कारण सालों से यही है। कमीशन खोरी तो दवाई के अलावा कई अन्य टेस्ट पर मिलती ही है।
सरकार किसी की भी हो यह तो यही रहेंगे अगर वास्तव में गरीब और आम जनता की इनको परवाह होती तो ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं देते। और ग्रामीण क्षेत्र के गरीब लोग आपको भगवान की तरह पूजते।
